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विवादित बयान पर हाजी मोहम्मद परवेज़ सिद्दीकी की प्रतिक्रिया

-विवादित बयान पर हाजी मोहम्मद परवेज़ सिद्दीकी की प्रतिक्रिया

बोले- धार्मिक मंचों से न फैलाई जाए सनसनी

मुजफ्फरपुर। मुजफ्फरपुर के प्रसिद्ध इस्लामिक स्कॉलर, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आरक्षण मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षा के चेयरमैन हाजी मोहम्मद परवेज़ सिद्दीकी ने मौलाना जरजीश अंसारी द्वारा भगवान श्रीकृष्ण को लेकर दिए गए कथित विवादित बयान की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने कहा कि धार्मिक मंचों का उपयोग किसी भी धर्म की आस्था पर सवाल उठाने या सनसनी फैलाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
हाजी मोहम्मद परवेज़ सिद्दीकी ने कहा कि भारत की पहचान उसकी विविधता, आपसी सम्मान और धार्मिक सह-अस्तित्व की परंपरा से है। ऐसे गैर-जरूरी और विवादित बयान करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के साथ-साथ समाज में तनाव और अविश्वास का माहौल भी पैदा कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि इस्लाम कहीं भी यह शिक्षा नहीं देता कि दूसरे धर्मों के पूजनीय व्यक्तित्वों के बारे में बिना किसी ठोस प्रमाण के ऐसे दावे किए जाएं, जिनसे विवाद और मतभेद बढ़ें।

इस्लाम की मूल भावना अमन, इंसाफ, समझदारी और सभी धर्मों की भावनाओं के सम्मान में है। इसलिए प्रत्येक धार्मिक नेता को सार्वजनिक मंच से बोलते समय अपने शब्दों का चयन सोच-समझकर करना चाहिए।
हाजी परवेज़ सिद्दीकी ने कहा कि जब कोई धार्मिक नेता सार्वजनिक मंच से बयान देता है, तो उसकी जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। यदि वह अपने शब्दों की जिम्मेदारी नहीं निभाता, तो उसके बयान का व्यापक सामाजिक प्रभाव पड़ सकता है। धार्मिक नेतृत्व का उद्देश्य समाज को जोड़ना, आपसी सद्भाव बनाए रखना और सकारात्मक संदेश देना होना चाहिए, न कि विवाद और विभाजन पैदा करना।
उन्होंने सभी धर्मगुरुओं से अपील की कि वे सार्वजनिक मंचों पर बोलते समय संयम, तथ्यों और संवैधानिक मर्यादाओं का पालन करें। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में देश को ऐसे संदेशों की आवश्यकता है, जो भाईचारे, संवाद, सामाजिक एकता और राष्ट्रीय सद्भाव को मजबूत करें।
हाजी मोहम्मद परवेज़ सिद्दीकी ने देशभर के इस्लामी संस्थानों, मदरसों, मस्जिदों की प्रबंधन समितियों और धार्मिक आयोजकों से भी आग्रह किया कि वे ऐसे लोगों को मंच देने से बचें, जो बिना प्रमाण के विवादित या भड़काऊ बयान देकर समाज में भ्रम, धार्मिक तनाव या वैमनस्य फैलाने का प्रयास करते हों। उन्होंने कहा कि इस्लामी मंचों का उद्देश्य अमन, भाईचारा, शिक्षा, नैतिक मूल्यों और सामाजिक सुधार का संदेश देना है, न कि किसी प्रकार का विवाद या सनसनी फैलाना।