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बाढ़ पीड़ितों के लिए भेजी गई राहत सामग्री नेपाल बॉर्डर पर रोकी गई, कस्टम प्रक्रिया में अटकी दो पिकअप

-बाढ़ पीड़ितों के लिए भेजी गई राहत सामग्री नेपाल बॉर्डर पर रोकी गई, कस्टम प्रक्रिया में अटकी दो पिकअप

जनकपुरधाम/मिश्री लाल मधुकर। नेपाल के रसुवा जिले में बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित लोगों की मदद के लिए भारत के कोलकाता से भेजी गई राहत सामग्री को नेपाल-भारत सीमा पर कस्टम अधिकारियों ने रोक दिया है। राहत सामग्री से लदे दो पिकअप ट्रक गौर कस्टम कार्यालय के पास रोके जाने से मानवीय सहायता पहुंचाने में परेशानी खड़ी हो गई है।

जानकारी के अनुसार, कोलकाता से नेपाल आ रहे दो पिकअप वाहन, जिनके नंबर WB 5 A 2489 और WB 19 L 9091 हैं, को बैरगनिया-गौर सीमा पर कस्टम प्रक्रिया के लिए रोक दिया गया। इन वाहनों में भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में आई बाढ़ तथा भूस्खलन से प्रभावित लोगों के लिए राहत सामग्री भेजी गई थी।

दोनों वाहनों में 30 बोरी चावल, प्रत्येक 25 किलो, 50 डिब्बे बिस्कुट, 40 डिब्बे पानी, दो डिब्बे लस्सी, 20 बोरी भुजा (मूढ़ी), दो बोरी आलू, दो बोरी नमक, चार डिब्बे केक, 20 किलो आटा, एक बोरी चना, दो बोरी चूड़ा, 100 टॉर्चलाइट, आठ तिरपाल और चार डिब्बे कपड़े शामिल हैं।

कोलकाता निवासी हरिश्चंद्र साहू ने बताया कि मानवीय सहायता के उद्देश्य से राहत सामग्री नेपाल भेजी गई थी, लेकिन कस्टम प्रक्रिया और शुल्क से संबंधित प्रावधानों के कारण इसे सीमा पर रोक दिया गया। उनके अनुसार, नेपाल में खाद्य सामग्री ले जाने से पहले फूड क्वारंटाइन जांच की प्रक्रिया पूरी करना जरूरी बताया गया है। वहीं कपड़े और अन्य सामग्री के लिए भी कस्टम प्रक्रिया पूरी करने और निर्धारित शुल्क जमा करने की बात कही जा रही है।

राहत सामग्री लेकर आए लोगों का कहना है कि जब तक कस्टम प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक सामान को गौर कस्टम कार्यालय से नेपाल में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा रही है। इससे बाढ़ प्रभावित लोगों तक समय पर राहत पहुंचाने में देरी हो रही है।

गौर नगरपालिका के मेयर शंभू साह ने कहा कि संकट की स्थिति में नेपाली नागरिकों की मदद के लिए लाई गई मानवीय राहत सामग्री पर कस्टम ड्यूटी लगाना उचित नहीं है। सरकार को तत्काल ऐसी सामग्री की पहचान और सत्यापन की व्यवस्था करनी चाहिए, जो वास्तव में बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए लाई गई है। ऐसी राहत सामग्री को कस्टम शुल्क से मुक्त किया जाना चाहिए।

बताया गया कि राहत सामग्री रोके जाने की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले हरियाणा से नेपाल भेजी जा रही राहत सामग्री को भी नेपाली कस्टम अधिकारियों ने रोका था। लगातार ऐसी घटनाओं से भारत के विभिन्न एनजीओ और व्यक्तिगत स्तर पर नेपाल में राहत सामग्री भेजने की तैयारी कर रहे लोगों के बीच भी असमंजस की स्थिति पैदा हुई है। स्थानीय स्तर पर आशंका जताई जा रही है कि यदि राहत सामग्री के लिए सरल व्यवस्था नहीं की गई तो कई संगठन और लोग मानवीय मदद भेजने का अपना फैसला बदल सकते हैं।