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29 अगस्त से 2 सितंबर तक उत्तर बिहार में हल्की से मध्यम बारिश के आसार

29 अगस्त से 2 सितंबर तक उत्तर बिहार में हल्की से मध्यम बारिश के आसार

-किसानों को फसलों की नियमित निगरानी की सलाह

समस्तीपुर/पूसा। डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के ग्रामीण कृषि मौसम सेवा एवं कृषि मौसम विभाग ने 29 अगस्त से 2 सितंबर 2026 तक के लिए मौसम पूर्वानुमान जारी किया है। पूर्वानुमान के अनुसार इस अवधि में उत्तर बिहार के अधिकांश जिलों में आसमान में हल्के से मध्यम बादल छाए रह सकते हैं। 30 अगस्त से 1 सितंबर के बीच बेगूसराय, दरभंगा, समस्तीपुर, सीवान, वैशाली, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, पूर्वी एवं पश्चिमी चंपारण के कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। कुछ स्थानों पर भारी बारिश भी हो सकती है।
मौसम विभाग के अनुसार पूर्वानुमान अवधि में अधिकतम तापमान 32 से 36 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 24 से 28 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है। सुबह के समय सापेक्ष आर्द्रता करीब 90 प्रतिशत और दोपहर में 50 से 55 प्रतिशत के आसपास रह सकती है। इस दौरान हवाएं मुख्य रूप से पूर्वी एवं दक्षिण-पूर्वी दिशा से 10 से 25 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने की संभावना है।
इससे पहले पिछले तीन दिनों के मौसम का आकलन करते हुए मौसम वैज्ञानिकों ने बताया कि पूसा में औसत अधिकतम तापमान 33.3 डिग्री और न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस रहा। सुबह की औसत सापेक्ष आर्द्रता 90 प्रतिशत और दोपहर में 78 प्रतिशत दर्ज की गई। हवा की औसत गति 7.7 किलोमीटर प्रति घंटा रही, जबकि दैनिक वाष्पन 4.3 मिलीमीटर और औसत धूप 3.2 घंटे प्रतिदिन दर्ज की गई। इस अवधि में 3.2 मिलीमीटर बारिश हुई।
कृषि मौसम वैज्ञानिकों ने किसानों को धान की फसल में तना छेदक, पत्ती लपेटक और भूरा फुदका की नियमित निगरानी करने की सलाह दी है। तना छेदक एवं पत्ती लपेटक का प्रकोप दिखाई देने पर अनुशंसित कीटनाशक का निर्धारित मात्रा में प्रयोग करने को कहा गया है। देर से बोई गई धान की फसल में खैरा रोग की निगरानी करने और लक्षण दिखने पर जिंक सल्फेट एवं चूने के घोल का छिड़काव करने की सलाह दी गई है। भूरा फुदका का अधिक प्रकोप होने पर इमिडाक्लोप्रिड आधारित दवा के प्रयोग की सलाह दी गई है।
मक्का की फसल में भी तना छेदक और फॉल आर्मीवर्म की नियमित निगरानी करने को कहा गया है। तना छेदक के लक्षण मिलने पर प्रभावित पौधों के गोभ में अनुशंसित दवा का प्रयोग तथा फॉल आर्मीवर्म के नियंत्रण के लिए इमामेक्टिन बेंजोएट का छिड़काव करने की सलाह दी गई है। जरूरत पड़ने पर पहले छिड़काव के सात दिन बाद दूसरा छिड़काव करने को कहा गया है।


मौसम को देखते हुए किसानों को अरहर की बुआई 25 अगस्त से 15 सितंबर तक ऊंचास भूमि तथा धान की रोपाई नहीं होने के कारण खाली खेतों में करने की सलाह दी गई है। इसके लिए शरद, पूसा-9 और राजेंद्र अरहर-1 जैसी किस्मों के चयन की सलाह दी गई है। अरहर में संतुलित मात्रा में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और सल्फर के प्रयोग के साथ बुआई के 25 से 30 दिन बाद नाइट्रोजन की टॉप ड्रेसिंग करने को कहा गया है।
मौसम विभाग ने किसानों को परवल की बुआई इस सप्ताह तक पूरी करने की सलाह दी है। उत्तर बिहार के लिए राजेंद्र परवल-1, राजेंद्र परवल-2, राजेंद्र परवल-3, स्वर्ण रेखा, स्वर्ण अलौकिक और स्वर्ण सुरभि किस्मों को उपयुक्त बताया गया है। वहीं ऊंचास भूमि वाले क्षेत्रों में अगस्त महीने में मिश्रिकंद की बुआई करने की सलाह दी गई है।
शरदकालीन शकरकंद की खेती के लिए खेत की तैयारी पूरी करने को कहा गया है। उचित जल निकास वाली हल्की बलुई दोमट मिट्टी को इसके लिए उपयुक्त बताया गया है। खेत की दो से तीन बार जुताई कर समतलीकरण करने और पर्याप्त मात्रा में सड़ी हुई कंपोस्ट खाद मिलाने की सलाह दी गई है। उत्तर बिहार के लिए राजेंद्र शकरकंद-5, राजेंद्र शकरकंद-35, राजेंद्र शकरकंद-47, राजेंद्र शकरकंद-43, श्री भद्रा, कालमेघ और राजेंद्र शकरकंद-92 किस्मों को अनुशंसित किया गया है।
बैंगन की फसल में तना एवं फल छेदक कीट की नियमित निगरानी करने की सलाह दी गई है। प्रभावित टहनियों एवं फलों को तोड़कर खेत से बाहर करने तथा कीटनाशक के छिड़काव से पहले संक्रमित पौधों के हिस्सों को एकत्र कर मिट्टी में दबाने को कहा गया है। अधिक प्रकोप की स्थिति में अनुशंसित कीटनाशक का छिड़काव करने की सलाह दी गई है।
कृषि मौसम सेवा ने किसानों से अपील की है कि अगले कुछ दिनों में संभावित बारिश और उमस को देखते हुए खेतों में जल निकासी की समुचित व्यवस्था रखें तथा फसलों में कीट एवं रोग के लक्षणों की नियमित निगरानी करते रहें।