-नेपाल में हालात सामान्य होने लगे, लेकिन बिहार के सीमावर्ती बाजारों पर संकट बरकरार
मुजफ्फरपुर। नेपाल में हिंसा की घटनाओं में कमी आने और कई इलाकों से कर्फ्यू हटने के बावजूद इसका असर बिहार के सीमावर्ती जिलों में अब भी साफ दिखाई दे रहा है। भारत-नेपाल सीमा से जुड़े बाजारों में ग्राहकों की कमी के कारण कारोबार प्रभावित है। सबसे अधिक परेशानी छोटे व्यापारियों, सब्जी विक्रेताओं और ई-रिक्शा चालकों को उठानी पड़ रही है।
मधुबनी जिले के जयनगर से सटे नेपाल के सिरहा और धनुषा जिलों में शनिवार को कर्फ्यू हटा लिया गया। इसके बावजूद भारतीय सीमा के जयनगर, लौकहा और हरलाखी के बाजारों में पहले जैसी रौनक नहीं लौट सकी है। दुकानें खुली हैं, लेकिन नेपाली ग्राहकों की आवाजाही लगभग बंद है। वहीं, नेपाली ट्रेन सेवा अगले आदेश तक स्थगित रहने से सीमा पार आवागमन भी प्रभावित बना हुआ है।
सीतामढ़ी के भिट्ठामोड़ बॉर्डर पर भी स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकी है। जनकपुर जाने वाले यात्री और बाबा बैद्यनाथ धाम (देवघर) से लौट रहे नेपाली श्रद्धालु सीमा पर ही फंसे हुए हैं। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के कारण उन्हें आगे जाने की अनुमति नहीं मिल पा रही है, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

सीमा पर आवाजाही कम होने का सबसे अधिक असर स्थानीय कारोबारियों पर पड़ा है। ई-रिक्शा चालकों की आय लगभग ठप हो गई है, जबकि सब्जी विक्रेताओं और अन्य दुकानदारों का कहना है कि ग्राहकों की संख्या में भारी गिरावट आई है। नेपाल से खरीदारों के नहीं आने के कारण सोनबरसा और कन्हौली के बाजारों में भी कारोबार मंदा पड़ गया है।
पूर्वी चंपारण के रक्सौल में बाजार खुले रहे, लेकिन लोहापट्टी, बैंक रोड और कस्टम कार्यालय के आसपास करीब 70 प्रतिशत कारोबार प्रभावित रहा। सीमा पर पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने जांच और निगरानी बढ़ा दी है, जिससे व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ा है।
वहीं, पश्चिम चंपारण के भिस्वा और त्रिवेणी बाजारों में स्थिति सामान्य बनी हुई है। यहां दुकानें रोज की तरह खुली हैं और एसएसबी तथा सीमाई थाना पुलिस लगातार सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखे हुए है। हालांकि सीमावर्ती क्षेत्रों के व्यापारियों का कहना है कि नेपाल में पूरी तरह सामान्य हालात बहाल होने और सीमा पार आवाजाही सुचारु होने के बाद ही बाजारों की रौनक फिर लौट सकेगी।















