-नेपाल में बाढ़ के 9 दिन बाद टूटी लापता लोगों के परिजनों की उम्मीद, कुश का पुतला बनाकर किया अंतिम संस्कार
जनकपुरधाम/मिश्री लाल मधुकर। नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ को नौ दिन बीतने के बाद लापता लोगों के परिवारों का सब्र और उम्मीद अब जवाब देने लगी है। लंबे समय तक खोजबीन के बावजूद कोई सुराग नहीं मिलने पर कई परिवारों ने अपने लापता परिजनों को मृत मानकर हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार अंतिम संस्कार की रस्में शुरू कर दी हैं।
बेतरावती के बोगटी टार गांव में आचार्य परिवार के दो सगे भाई केदार प्रसाद आचार्य (65) और मधुसूदन आचार्य (60) 26 अगस्त की सुबह करीब आठ बजे मवेशियों के लिए चारा काटने नदी किनारे जंगल की ओर गए थे। इसके बाद दोनों लापता हो गए। परिजनों और सरकारी एजेंसियों ने नौ दिनों तक संभावित स्थानों पर उनकी तलाश की, लेकिन दोनों का कोई पता नहीं चल सका।
जब बरामद शवों में भी दोनों भाइयों की पहचान नहीं हो सकी तो परिवार ने उन्हें मृत मानते हुए शोक और शुद्धि की धार्मिक रस्में शुरू कर दीं। परिजनों का कहना है कि नौ दिन तक हर संभावित जगह तलाश की गई, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। इतने समय बाद अब उनके जीवित मिलने की उम्मीद लगभग खत्म हो चुकी है।
परिजनों के मुताबिक, बाढ़ की तेज धारा में दोनों के शरीर बह गए होंगे या लंबे समय तक पानी में रहने के कारण नष्ट हो गए होंगे। इसी वजह से हिंदू परंपरा के अनुसार नौवें दिन से मुंडन, पिंडदान और श्राद्ध कर्म शुरू किया गया है।

इसी तरह काठमांडू के पशुपति आर्यघाट में भी करीब एक दर्जन लापता लोगों के परिजनों ने कुश का पुतला बनाकर हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार प्रतीकात्मक दाह संस्कार किया। यह दृश्य बाढ़ की त्रासदी के बीच उन परिवारों की बेबसी और टूट चुकी उम्मीद को बयां करता है, जिन्हें अपने प्रियजनों के शव तक नसीब नहीं हो सके।
बाढ़ में मृतकों की संख्या 1,252, अब भी 4,216 लापता:
नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) की 3 सितंबर की दोपहर जारी रिपोर्ट के अनुसार, बाढ़ और आपदा में मृतकों की संख्या बढ़कर 1,252 हो गई है, जबकि 4,216 लोग अब भी लापता हैं।
रिपोर्ट के अनुसार सबसे अधिक मौतें चितवन में हुई हैं, जहां 355 शव बरामद किए गए हैं। इसके बाद नवलपरासी ईस्ट में 218, नवलपरासी वेस्ट में 208 और नुवाकोट में 177 लोगों की मौत हुई है। आपदा की शुरुआत वाले रसुवा जिले में 127 मौतें दर्ज की गई हैं। इसके अलावा गोरखा, धाडिंग और तनाहुन जिलों से भी शव बरामद किए गए हैं।
बरामद शवों में अब तक केवल 95 लोगों की पहचान हो सकी है। पहचान के बाद शवों को उनके परिजनों को सौंप दिया गया है। हजारों लोगों के अब भी लापता होने से नेपाल में त्रासदी का दायरा लगातार गंभीर बना हुआ है।













