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जेल में फांसी लगाने की कोशिश; साथी की सतर्कता से बची जान

-जेल में फांसी लगाने की कोशिश; साथी की सतर्कता से बची जान

-जमानत खारिज होने की खबर से तनाव में आया बंदी

मुजफ्फरपुर। शहीद खुदीराम बोस केंद्रीय कारा में गुरुवार की देर रात एक विचाराधीन बंदी ने फांसी लगाकर आत्महत्या करने की कोशिश की। जमानत याचिका खारिज होने की जानकारी मिलने के बाद मानसिक तनाव में आए बंदी मो. सिराज ने जेल कक्ष के शौचालय में गमछे का फंदा बनाकर गले में डाल लिया। हालांकि, समय रहते साथी बंदी की नजर पड़ जाने और जेल प्रशासन की तत्परता से उसकी जान बचा ली गई।
जानकारी के अनुसार, मो. सिराज के परिजनों ने गुरुवार को ई-मुलाकाती पोर्टल के माध्यम से उससे मुलाकात की थी। इसी दौरान परिजनों ने उसे कोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने की जानकारी दी। जमानत नहीं मिलने की बात सुनकर वह काफी तनाव में आ गया था। देर रात उसने आत्मघाती कदम उठाने का प्रयास किया।


बताया गया कि जेल कक्ष संख्या 3/4 में बंद सिराज रात करीब 12:25 से 12:35 बजे के बीच शौचालय में गया और गमछे का फंदा बनाकर फांसी लगाने की कोशिश की। इसी दौरान कक्ष में बंद दूसरे बंदी रंजन कुमार शौच के लिए उठे। उनकी नजर फंदे से लटके सिराज पर पड़ी। उन्होंने तत्काल सिपाहियों को सूचना दी। इसके बाद कक्षपाल को अलर्ट किया गया और दरवाजा खोलकर सिराज को नीचे उतारा गया।
जेल प्रशासन ने उसे तत्काल कारा अस्पताल पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए एसकेएमसीएच रेफर कर दिया गया। फिलहाल बीएसएपी की कड़ी सुरक्षा के बीच एसकेएमसीएच में उसका इलाज चल रहा है।
मो. सिराज पियर थाना क्षेत्र के गोविंदपुर छपरा में 30 अप्रैल को चिकन शॉप संचालक मो. नौशाद की हत्या के मामले में जेल में बंद है। पुलिस जांच के अनुसार, सिराज पर अपनी पत्नी के प्रेमी की हत्या करने का आरोप है। इस मामले में उसे गिरफ्तार कर छह मई को शहीद खुदीराम बोस केंद्रीय कारा भेजा गया था।
घटना के संबंध में जेल प्रशासन ने मिठनपुरा थाने में प्राथमिकी दर्ज करने के लिए आवेदन दिया है।