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नेपाल में फिर मंडराया बाढ़ का खतरा, तिब्बत में झील टूटने की सूचना से भोटेकोशी नदी में उफान की आशंका

नेपाल में फिर मंडराया बाढ़ का खतरा, तिब्बत में झील टूटने की सूचना से भोटेकोशी नदी में उफान की आशंका

काठमांडू(दीपक कुमार तिवारी)।नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में प्राकृतिक आपदा के बाद एक बार फिर बड़े बाढ़ के खतरे की आशंका ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। चीन के तिब्बती क्षेत्र में छोचेन खोला और पुरेपु त्सांगपो नदी के संगम के पास बनी एक बड़ी झील के टूटने की सूचना सामने आई है। इसके बाद नेपाल के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने की आशंका जताई गई है। नेपाल पुलिस और प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों को तत्काल सतर्क रहने तथा खतरे की स्थिति में सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है।
उत्तरगया ग्रामीण नगरपालिका के अध्यक्ष माधव प्रसाद अर्याल ने भोटेकोशी नदी में पहले जैसी तेज बाढ़ आने की आशंका जताते हुए स्थानीय लोगों से विशेष सावधानी बरतने को कहा है। नदी के आसपास रहने वाले लोगों को किसी भी तरह का जोखिम नहीं उठाने और सुरक्षित स्थानों की ओर जाने की सलाह दी गई है।
रसुवा के प्रमुख जिला अधिकारी नरेंद्र परियार के अनुसार, चीनी पक्ष से संबंधित झील के टूटने की जानकारी मिली है। सूचना मिलते ही नेपाल के प्रशासनिक और सुरक्षा तंत्र को अलर्ट कर दिया गया है। भोटेकोशी नदी के जलस्तर में अचानक वृद्धि की आशंका को देखते हुए संवेदनशील इलाकों पर नजर रखी जा रही है।


नई आशंका को देखते हुए नेपाल में पहले से राहत और बचाव कार्य में जुटे सुरक्षाकर्मियों तथा रेस्क्यू टीमों को भी सतर्क कर दिया गया है। संभावित बाढ़ की स्थिति में लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस ने आम नागरिकों से नदी और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से दूर रहने तथा खतरे के संकेत मिलते ही सुरक्षित स्थान पर चले जाने की अपील की है।
इससे पहले नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में ग्लेशियर फटने और बाढ़-भूस्खलन की घटनाओं से भारी तबाही की सूचना सामने आई थी। इन घटनाओं के बाद भोटेकोशी और आसपास के क्षेत्रों में प्रशासन पहले से ही सतर्क था। अब तिब्बती क्षेत्र में झील टूटने की सूचना ने संभावित नए खतरे की चिंता बढ़ा दी है।
नेपाल-चीन सीमा क्षेत्र में आई बाढ़ और भूस्खलन का असर कैलाश-मानसरोवर यात्रा पर भी पड़ा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, आपदा के कारण कैलाश पर्वत की यात्रा पर गए 178 भारतीय तीर्थयात्रियों के लापता होने की सूचना है। नेपाल और तिब्बत में बाढ़ तथा भूस्खलन के कारण बड़ी संख्या में लोगों के प्रभावित होने की बात सामने आई है।
दक्षिण-पश्चिमी तिब्बत में चीन-नेपाल और भारत की सीमाओं के निकट स्थित कैलाश पर्वत समुद्र तल से 6,400 मीटर से अधिक ऊंचाई पर है। इसके पास स्थित मानसरोवर झील हिंदू, बौद्ध, जैन और तिब्बती बोन परंपरा के अनुयायियों के लिए अत्यंत पवित्र मानी जाती है। हिंदू धर्म में कैलाश को भगवान शिव और देवी पार्वती का निवास स्थान माना जाता है।
कैलाश यात्रा के दौरान श्रद्धालु पर्वत पर चढ़ाई नहीं करते, बल्कि करीब 53 किलोमीटर की परिक्रमा करते हैं। सामान्य परिस्थितियों में इस परिक्रमा को पूरा करने में लगभग तीन दिन लगते हैं। हालांकि, मौजूदा बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति ने इस क्षेत्र में यात्रा और आवाजाही को प्रभावित किया है।