-सरकारी धान बीज पर उठे सवाल, चार प्रक्षेत्रों में 30 से 50 प्रतिशत ही हुआ अंकुरण
मुजफ्फरपुर। अच्छी धान की फसल का सपना लेकर तैयार किए गए सरकारी बीज ने ही किसानों की चिंता बढ़ा दी है। जिले के चार राजकीय बीज गुणन प्रक्षेत्रों में तैयार की गई धान की नर्सरी में बीज का अंकुरण निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं हुआ। साहेबगंज, जसौली, देवरिया और कांटी में लगाए गए धान बीज का अंकुरण महज 30 से 50 प्रतिशत के बीच पाया गया है। कम अंकुरण की रिपोर्ट सामने आने के बाद कृषि विभाग ने मामले की वैज्ञानिक जांच कराने का निर्णय लिया है।
विभागीय जानकारी के अनुसार, अनुमंडल कृषि पदाधिकारी (पश्चिमी) ने राजकीय बीज गुणन प्रक्षेत्रों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान एस. उन्नत धान बीज की नर्सरी में अंकुरण की स्थिति अपेक्षा से काफी कम मिली। निरीक्षण रिपोर्ट के अनुसार साहेबगंज में दो हेक्टेयर, जसौली में 4.50 हेक्टेयर, देवरिया में 3.50 हेक्टेयर और कांटी में दो हेक्टेयर क्षेत्र में धान की नर्सरी तैयार की गई थी। सभी प्रक्षेत्रों में बीज का अंकुरण 30 से 50 प्रतिशत के बीच ही पाया गया।

बड़े क्षेत्रफल में कम अंकुरण मिलने के बाद विभागीय अधिकारियों ने इसके कारणों की वैज्ञानिक जांच जरूरी मानी है। अनुमंडल कृषि पदाधिकारी ने कम अंकुरण के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए जिला कृषि पदाधिकारी और कृषि विज्ञान केंद्र, सरैया को पत्र भेजा है। पत्र में बीज की गुणवत्ता और अंकुरण क्षमता की वैज्ञानिक जांच कराने का अनुरोध किया गया है। जांच के दौरान बीज की गुणवत्ता, भंडारण व्यवस्था और अन्य संभावित कारणों की भी पड़ताल की जाएगी।
जिला कृषि पदाधिकारी भारत भूषण ने बताया कि अनुमंडल कृषि पदाधिकारी (पश्चिमी) की रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है। इसके आधार पर कृषि वैज्ञानिकों से बीज की अंकुरण क्षमता की जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद कम अंकुरण के वास्तविक कारणों का पता चलेगा और उसी के अनुरूप आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।
कृषि विभाग का कहना है कि राजकीय बीज गुणन प्रक्षेत्रों की नियमित निगरानी की जा रही है। विभाग का उद्देश्य किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराना है। वैज्ञानिक जांच के बाद सामने आने वाले कारणों के आधार पर बीज उत्पादन प्रक्रिया और निगरानी व्यवस्था में सुधार किया जाएगा, ताकि भविष्य में किसानों को बेहतर गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराए जा सकें।













