-सड़क हादसे में घायलों को मिलेगा 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज, मुजफ्फरपुर में कार्यशाला आयोजित
-आर्थिक तंगी के कारण इलाज में नहीं होगी देरी, पुलिस को 24 घंटे में करना होगा सत्यापन
मुजफ्फरपुर, 28 अक्टूबर। सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्तियों को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने और आर्थिक परेशानी के कारण इलाज में होने वाली देरी को रोकने के उद्देश्य से बुधवार को समाहरणालय सभाकक्ष में PM-RAHAT योजना को लेकर जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। जिला सड़क सुरक्षा समिति के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला में योजना के प्रभावी क्रियान्वयन, कैशलेस उपचार की प्रक्रिया और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यशाला का शुभारंभ जिला परिवहन पदाधिकारी प्रियंका सिन्हा ने किया। उन्होंने बताया कि PM-RAHAT योजना के तहत पात्र सड़क दुर्घटना पीड़ितों को अधिकतम सात दिनों तक 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार उपलब्ध कराने का प्रावधान है। सड़क दुर्घटना के बाद का पहला घंटा बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान घायल को त्वरित चिकित्सा सुविधा मिलने से उसकी जान बचने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए आर्थिक स्थिति या भुगतान की चिंता के कारण किसी भी घायल के इलाज में देरी नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने बताया कि सड़क दुर्घटना की स्थिति में आपातकालीन सहायता के लिए 112 नंबर पर संपर्क किया जा सकता है। घायल को योजना से संबद्ध नजदीकी अस्पताल में पहुंचाया जा सकता है। यदि आसपास संबद्ध अस्पताल उपलब्ध नहीं हो, तो निकटतम उपयुक्त अस्पताल में तत्काल प्राथमिक उपचार शुरू किया जाना चाहिए।

पुलिस को 24 घंटे में करना होगा सत्यापन:
कार्यशाला में योजना के तहत उपचार और सत्यापन की प्रक्रिया की जानकारी दी गई। अस्पताल में घायल का उपचार शुरू करने के बाद संबंधित विवरण TMS पोर्टल पर दर्ज कर सत्यापन के लिए पुलिस थाने को भेजा जाएगा। संबंधित थानाध्यक्ष या नामित नोडल पदाधिकारी को एसएमएस के माध्यम से सूचना मिलेगी। इसके बाद पुलिस को निर्धारित 24 घंटे की समय-सीमा में मामले की जांच और सत्यापन करना होगा। सत्यापन के बाद पात्र दुर्घटना पीड़ित को योजना के प्रावधानों के अनुसार कैशलेस उपचार का लाभ मिलेगा।
जिला परिवहन पदाधिकारी ने स्पष्ट किया कि ऑनलाइन प्रक्रिया और प्रशासनिक औपचारिकताओं के कारण उपचार शुरू करने में किसी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए। घायल को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराते हुए आवश्यक प्रक्रियाएं समानांतर रूप से पूरी की जानी चाहिए।
अस्पतालों में लगाए जाएंगे जागरूकता बैनर:
सिविल सर्जन डॉ. सुधीर कुमार ने योजना से संबद्ध अस्पतालों के प्रतिनिधियों और संचालकों को अस्पताल परिसर में प्रमुख स्थानों पर बैनर एवं फ्लेक्स लगाने का निर्देश दिया। इनमें योजना के प्रावधानों, कैशलेस उपचार की सीमा और लाभ प्राप्त करने की प्रक्रिया की जानकारी प्रदर्शित की जाएगी। उन्होंने अस्पताल कर्मियों को भी योजना के प्रति जागरूक रहने और दुर्घटना पीड़ितों के उपचार में संवेदनशीलता एवं तत्परता बरतने को कहा।
कार्यशाला में यातायात पुलिस उपाधीक्षक अभिजीत अखिलेश, आयुष्मान भारत की नोडल पदाधिकारी बिमला कुमारी, जिले के विभिन्न थानों के थानाध्यक्ष तथा योजना से संबद्ध अस्पतालों के प्रतिनिधि एवं संचालक उपस्थित रहे।
अधिकारियों ने कहा कि योजना का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने के लिए पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, परिवहन विभाग और अस्पताल प्रबंधन के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। जिला सड़क सुरक्षा समिति ने आम नागरिकों से अपील की कि सड़क दुर्घटना में किसी व्यक्ति के घायल होने पर तत्काल सहायता उपलब्ध कराएं और आपातकालीन मदद के लिए 112 पर संपर्क करें।












