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बंदरा में जमीन सर्वे के नाम पर रिश्वत लेने का आरोप, सरकारी अमीन का वीडियो वायरल; जांच की मांग

-बंदरा में जमीन सर्वे के नाम पर रिश्वत लेने का आरोप, सरकारी अमीन का वीडियो वायरल; जांच की मांग

मुजफ्फरपुर। जिले के बंदरा प्रखंड में जमीन सर्वे के नाम पर कथित तौर पर रिश्वत लेने का मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में सरकारी अमीन के किसान से कथित तौर पर पैसे लेते हुए नजर आने का दावा किया जा रहा है। वीडियो सामने आने के बाद इलाके में चर्चा तेज हो गई है। वहीं, शिकायतकर्ताओं ने सर्वे पदाधिकारी को लिखित आवेदन देकर मामले की जांच कराने और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई करने की मांग की है।

मामला बंदरा प्रखंड के मोहनपुर मौजा संख्या 883 से जुड़ा बताया जा रहा है। मोहनपुर निवासी रंजीत यादव समेत कई लोगों ने सरकारी अमीन रमन कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए सर्वे पदाधिकारी को आवेदन दिया है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, इलाके में जमीन सर्वे का काम उक्त अमीन की देखरेख में किया जा रहा है।

आवेदन में आरोप लगाया गया है कि सर्वे के दौरान सरकारी अमीन संबंधित प्लॉट पर जाकर लोगों के नाम और मोबाइल नंबर दर्ज करते हैं। इसके बाद जमीन का बंटवारा करने, नक्शा काटने और सैटेलाइट नक्शे में रकबा दुरुस्त करने के नाम पर कथित तौर पर दो हजार से पांच हजार रुपये तक की मांग की जाती है। शिकायतकर्ताओं का यह भी आरोप है कि पैसे नहीं देने पर नक्शे में प्लॉट गलत तरीके से दर्ज करने की धमकी दी जाती है।

इस बीच, सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो ने मामले को और गंभीर बना दिया है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि वीडियो में सरकारी अमीन रमन कुमार एक किसान से कथित तौर पर पैसे लेते दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि वीडियो कब और किन परिस्थितियों में बनाया गया था।

शिकायतकर्ताओं ने सर्वे पदाधिकारी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जमीन सर्वे किसानों और आम लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। ऐसे में यदि सर्वे के नाम पर अवैध वसूली की जाती है, तो इससे लोगों को आर्थिक नुकसान के साथ जमीन के रिकॉर्ड और नक्शे से संबंधित समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

फिलहाल, मामले में प्रशासनिक जांच और कार्रवाई को लेकर लोगों की नजरें टिकी हैं। वायरल वीडियो की सत्यता और शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच के बाद ही पूरे प्रकरण की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी। संबंधित अमीन का पक्ष और प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना भी बाकी है।