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स्पॉट : मौत की काली छाया में छपरा का बहरौली!

-मौत की काली छाया में बहरौली

संवाददाता । छपरा/पटना।

बिहार के छपरा जिले के मसरख में जहरीली शराब से मरने वालों का आंकड़ा क्या है, इस पर ध्यान मत दीजिए। इस मामले में एक गांव का ही आंकड़ा समझ लीजिए, जहां लगभग 15 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है और दर्जनों लोग मरने की कतार में खड़े हैं। यह गांव है बहरौली। मसरख थाना अंतर्गत बनियापुर विधानसभा क्षेत्र में आने वाला बहरौली पंचायत है। मसरख मुख्य बाजार से इस गांव और पंचायत की दूरी महज 3 किलोमीटर है। सीतलपुर मसरख भया बहरौली होकर ही स्टेट हाईवे सिवान की तरफ जाती है। यहां आवागमन की सुविधा भी बेहतर है। इस पंचायत और गांव का जातीय समीकरण भी गजब का है। राजपूत,यादव,बनिया, मुस्लिम, सहनी, ब्राह्मण जाति की आबादी ज्यादा है। इस गांव में सोमवार की रात से ही मौतें प्रारंभ हो चुकी थी।मंगलवार की सुबह तक 5 से ज्यादा लोगों की लाशें गुपचुप तरीके से जलाई जा चुकी थी। उसके बाद का सरकारी आंकड़ा 15 पहुंचा। लगभग आधा दर्जन से ज्यादा लोग गंभीर रूप से बीमार है और जिंदगी की अंतिम सांसे गिन रहे।

कुछ घंटे के बाद उनका भी नाम मृतकों की सूची में होगा। मरने वालों की जातीय समीकरण की बात करें तो ब्राह्मण राजपूत यादव मुस्लिम और पिछड़ी जाति के लोग शामिल है। कुल जीतनी मौतें हुई हैं पूरे इलाके में उसकी 70 फ़ीसदी मौत सिर्फ इस पंचायत और गांव में हुई है। बगल के पंचायत में भी कुछ लोग बीमार हैं पर डर से कोई कुछ नहीं बोल रहा है। पुलिस की तरफ से दबाव है कि शराब नही कहना है, नहीं तो उल्टे केस हो जाएगा और मुआवजा भी नहीं मिलेगा,इसलिए मौत के बाद भी खामोशी है। मौत का मातम मनाने सत्ता पक्ष के लोग पहुंचे हैं, ना विपक्ष के लोग पहुंचे। कुछ खबरिया चैनल के लोग जरूर हवा का रुख भांप कर अपने मन मिजाज के हिसाब से कहानियां तैयार कर रहे हैं और असली सच्चाई से कोई वाकिफ नहीं। सिर्फ इस इलाके के शराबबंदी के सिंडिकेट को समझना है तो आप थाने के सबसे छोटे स्तर के कर्मचारी, स्थानीय स्तर के कई चौकीदारों के हाल ही में अर्जित किए गए अथाह संपत्ति की गणना कर लीजिए। आपको समझ में आ जाएगा कि पूरे इलाके में शराब माफियाओं का कैसा सिंडिकेट चल रहा है। पूरे इलाके का कोई चौक चौराहा बाजार नहीं है,जहां पर अवैध शराब उपलब्ध नहीं है। लोग पीते हैं तो बेचने वाले भी बम- बम है। गांव में लोगों की चिताओं को जलाने के लिए लकड़ी नहीं है ,इसलिए अब जेसीबी से गड्ढा करके लाशों को गाड़ा जा रहा है। मौत के बाद मुआवजे के लॉलीपॉप ने लोगों के जुबान पर ताला लगा दिया। कोई खुलकर बोलने को तैयार नहीं। खासकर जिसके घर में मौत हुई है,हालांकि लोग दबी जुबान में पूरी कहानी को बयां कर रहे। मसरख के यदु मोर से शुरू हुआ मौत का तांडव बगल के डूइला गांव बेन छपरा होते हुए बहरौली पंचायत में आकर रौद्र रूप धारण कर चुका है। बहरौली और मशरक के बीच में एक बाजार है देवरिया। वहां का एक स्प्रिट माफिया है। जिसने करोड़ों रुपए की अकूत संपत्ति अर्जित की है। कई बार जेल जा चुका है। प्रभाव इतना है कि जो उसके सिंडिकेट का आदमी पकड़ा जाता है। पैसे के बल पर तुरंत जमानत करवा लेता है। थाना पुलिस सब मैनेज है। नाम बच्चे बच्चे की जुबान पर है। डर से कोई बोलना नहीं चाहता। शराब बंदी वाले राज्य बिहार में शराब से मरने वाले लोगों का कोई नहीं था। सरकार और ना ही कोई सहायता करने वाली संस्थाएं। उल्टे पुलिस रजिस्टर में अपराधी के तौर पर उनका रिकॉर्ड तैयार हो जाता है। इसी कारण से शराब से मरने वाली मौत ठंडी या अन्य बीमारियों की मौतों में तब्दील हो जाती है, पर जब मौतों का आंकड़ा इतना ज्यादा होता है।तब चाह कर भी सच को नहीं छुपाया जा सकता,लेकिन इस जहरीली शराब कांड का सच शायद लोगों के सामने आ पाए और असली गुनाहगार सलाखों के पीछे हो, यह भी कहना सही होगा।अबतक मीडिया खबरों में 38 मौत होने की बात कही जा रही है। बिहार की राजधानी पटना में मीडिया के सवालों पर नाराज मुख्यमंत्री ने भी कह दिया कि’जो पिएगा सो मरेगा हीं’।