-मुजफ्फरपुर में सजी साहित्य की महफिल: निराला निकेतन में मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन
मुजफ्फरपुर। शहर के प्रतिष्ठित साहित्यिक मंच “महावाणी स्मरण” के तत्वावधान में निराला निकेतन, मुजफ्फरपुर में मासिक काव्य गोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता देवेन्द्र कुमार ने की, जबकि मंच संचालन डॉ. हरि किशोर प्रसाद सिंह ने किया। आयोजन की शुरुआत आचार्य श्री के गीतों से हुई, जिसने माहौल को साहित्यिक रंग में रंग दिया।
काव्य गोष्ठी में शहर के कई वरिष्ठ कवियों और साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। अंजनी कुमार पाठक ने “जिंदगी का ना कोई ठिकाना, आज यहाँ कल कहाँ है जाना” सुनाकर जीवन की अनिश्चितता को शब्दों में पिरोया। वहीं प्रमोद नारायण मिश्र ने “तुम्हारा रूप न देखा, तेरी प्रतिमा को ही देखा” के माध्यम से भावनात्मक अभिव्यक्ति प्रस्तुत की।

कवयित्री संगीता सागर ने “अतिथि देवो भव:” कविता के जरिए कामकाजी महिलाओं की पीड़ा को उजागर किया, जबकि वरिष्ठ कवयित्री उषा किरण श्रीवास्तव ने “माँ, मेरी वो खाट कहाँ से लाऊं…” सुनाकर पुरानी यादों को जीवंत कर दिया। अध्यक्ष देवेन्द्र कुमार ने “यज्ञसेनी” के माध्यम से पुरुष प्रधान समाज में नारी की स्थिति पर तीखा प्रहार किया।
मंच संचालक डॉ. हरि किशोर प्रसाद सिंह ने “आपकी जिंदगी में मैं खुशियों का रंग भरना चाहता हूँ” सुनाकर सकारात्मक संदेश दिया। उमेश राज, अरुण कुमार तुलसी और रामवृक्ष राम चकपुरी ने भी अपनी रचनाओं से समसामयिक और सामाजिक मुद्दों को उठाया। सत्येन्द्र कुमार ‘सत्येन’ की प्रस्तुति ने स्थानीय रंग बिखेरा, वहीं जगदीश शर्मा ने हास्य कविता से माहौल को हल्का-फुल्का बना दिया।
अंत में आयोजन में शामिल सभी साहित्यकारों का धन्यवाद ज्ञापन किया गया। यह काव्य गोष्ठी साहित्य प्रेमियों के लिए एक यादगार शाम साबित हुई, जहां शब्दों के माध्यम से समाज, संवेदना और संस्कृति का सुंदर संगम देखने को मिला।












