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शिक्षामित्र से प्राचार्य तक का सफर: राधेश्याम प्रसाद बने उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य

-शिक्षामित्र से प्राचार्य तक का सफर: राधेश्याम प्रसाद बने उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य

राजापाकर (वैशाली)। प्रखंड क्षेत्र के चित्रगुप्त नगर निवासी स्वर्गीय सूरज प्रसाद के पुत्र राधेश्याम प्रसाद ने अपने संघर्ष, मेहनत और लगन के दम पर एक प्रेरणादायक मुकाम हासिल किया है। वर्ष 2005 में मात्र 1500 रुपये मानदेय पर शिक्षामित्र के रूप में अपने करियर की शुरुआत करने वाले राधेश्याम प्रसाद आज बीपीएससी द्वारा चयनित होकर उच्च माध्यमिक विद्यालय रसूलपुर उर्फ मघौल (महुआ) के प्राचार्य बन गए हैं।

मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाले राधेश्याम प्रसाद ने शिक्षामित्र बनने से पहले निजी ट्यूशन के माध्यम से जीविका चलाते थे, जहां उन्हें 1500 रुपये से अधिक आमदनी होती थी। इसके बावजूद उन्होंने शिक्षामित्र की नौकरी को चुना और शिक्षा क्षेत्र में आगे बढ़ने का संकल्प लिया। कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया और निरंतर परिश्रम करते रहे।

उन्होंने फरवरी 2014 तक पीएम श्री मध्य विद्यालय राजापाकर में शिक्षक के रूप में सेवा दी। इसके बाद फरवरी 2014 से जून 2014 तक हाई स्कूल देसरी में कार्यरत रहे। जून 2014 से 4 मई 2026 तक उन्होंने वैशाली उच्च माध्यमिक विद्यालय महुआ में प्लस टू शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दीं।

सोमवार को उन्होंने महुआ प्रखंड स्थित उच्च माध्यमिक विद्यालय रसूलपुर उर्फ मघौल में प्राचार्य के पद पर योगदान दिया। इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं ने उन्हें अंगवस्त्र और पुष्पगुच्छ देकर भव्य स्वागत किया।

उनकी इस उपलब्धि पर शिक्षा जगत से जुड़े लोगों ने खुशी जाहिर करते हुए उन्हें बधाई दी है। राधेश्याम प्रसाद की यह सफलता न केवल युवाओं के लिए प्रेरणा है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि कठिन परिश्रम और दृढ़ संकल्प से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।