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स्पेशल: बिहार में आम में मीली बग की समस्या बढ़ रही,ससमय अलर्ट होने की जरूरत

-आम में मीली बग की समस्या बढ़ रही,ससमय अलर्ट होने की जरूरत

दीपक कुमार तिवारी।मुजफ्फरपुर।

आम में फूल आने से पहले शुष्क मौसम अच्छे फूल आने के लिए अनुकूल होता है।फूल आने के समय वर्षा फसल के लिए हानिकारक होती है,क्योंकि यह परागण में बाधा डालती है। दिसम्बर से फरवरी तक फूल आने के समय कोहरे, बादल छाए रहने के कारण फलों की खराब सेटिंग होती है और कीट और रोग की वृद्धि के लिए बहुत ही अनुकूल होता है। राधेश्याम कुमार, सहायक निदेशक, पौधा संरक्षण(मुज़फ़्फ़रपुर)ने क्षेत्र भ्रमण के क्रम में बताया कि
आम के फूलने और फल लगने की प्रक्रिया काफी हद तक मौसम की स्थिति पर निर्भर करती है। आम के फूलों के लिए आदर्श मौसम की स्थिति उच्च आर्द्रता और 30-37 डिग्री सेल्सियस के बीच का तापमान है। तापमान में धीरे-धीरे वृद्धि के बाद, ठंडे तापमान (आमतौर पर 25-30 डिग्री सेल्सियस के बीच) की अवधि से फूल आना शुरू हो जाता है।


आम के पेड़ आमतौर पर देर से सर्दियों या शुरुआती वसंत में खिलते हैं। अगर इस अवधि के दौरान मौसम आदर्श नहीं है, तो यह फूल आने में देरी कर सकता है या रोक सकता है। उदाहरण के लिए, यदि ठंडे तापमान की अवधि के दौरान यह बहुत गर्म या बहुत ठंडा है, तो फूल आने में देरी होगी। यदि यह गर्म तापमान अवधि के दौरान बहुत अधिक शुष्क है, तो फूलों के फल लगने की संभावना कम होगी।
बिहार राज्य में आम में मंजर, फरवरी के द्वितीय सप्ताह में आना प्रारम्भ कर देता है। यह आम की विभिन्न प्रजातियों तथा उस समय के तापक्रम द्वारा निर्धारित होता है। आजकल बिहार में मीली बग (गुजिया) की समस्या साल दर साल बढ़ते जा रही है।

यह है उपाय:

इस कीट के प्रबंधन के लिए आवश्यक है कि दिसम्बर-जनवरी में बाग के आस पास सफाई करके मिट्टी में क्लोरपायरीफास 1.5 डी. धूल 250 ग्राम /पेड का बुरकाव कर देना चाहिए तथा गुजिया कीट पेड़ पर न चढ सकें इसके लिए एल्काथीन की 45 सेमी की पट्टी आम के मुख्य तने के चारों तरफ सुतली से बांध देना चाहिए। ऐसा करने से यह कीट पेड़ पर नही चढ़ सकेगा। यदि आप ने पूर्व में ऐसा नही किया है एवं गुजिया कीट पेड पर चढ गया हो तो ऐसी अवस्था में डाएमेथोएट 30 ई.सी. या क्विनाल्फोस 25 ई.सी. 1.5 मीली दवा / लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए।

यह स्थिति हो सकती है नुकसानदायक:

जिन आम के बागों का प्रबंधन ठीक से नही होता है। वहां पर हापर या भुनगा कीट बहुत सख्या में हो जाते है। अतः आवश्यक है कि सूर्य का प्रकाश बाग में जमीन तक पहुचे, जहां पर बाग घना होता है। वहां भी इन कीटों की सख्या ज्यादा होती है।
पेड़ पर जब मंजर आते है तो ये मंजर इन कीटों के लिए बहुत ही अच्छे खाद्य पदार्थ होते है। जिनकी वजह से इन कीटों की संख्या में भारी वृद्धि हो जाती है। इन कीटों की उपस्थिति का दूसरी पहचान यह है कि जब हम बाग के पास जाते है, तो झुंड के झुंड कीड़े पास आते है। यदि इन कीटों को प्रबंन्धित न किया जाय तो ये मंजर से रस चूस लेते है तथा मंजर झड़ जाता है। जब प्रति बौर 10-12 भुनगा दिखाई दे तब हमें इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एस.एल. 1 मीली दवा / 3 लीटर पानी में घोल कर छिडकाव करना चाहिए। यह छिड़काव फूल खिलने से पूर्व करना चाहिए अन्यथा बाग में आने वाले मधुमक्खी के किड़े प्रभावित होते है। जिससे परागण कम होता है तथा उपज प्रभावित होती है।
पाउडरी मिल्डयू/ खर्रा रोग के प्रबंधन के लिए आवश्यक है कि मंजर आने के पूर्व घुलनशील गंधक 2 ग्राम / लीटर पानी मे घोलकर छिड़काव करना चाहिए। जब पूरी तरह से फल लग जाय तब इस रोग के प्रबंधन के लिए हेक्साकोनाजोल 1 मीली0/लीटर पानी में घोलकर छिडकाव करना चाहिए। जब तापक्रम 35डिग्री सेल्सियस से ज्यादा हो जाता है। तब इस रोग की उग्रता में कमी अपने आप आने लगती है।
टिकोलो (आम के छोटे फल) को गिरने से रोकने के लिए आवश्यक है कि प्लेनोफिक्स 1 मी.ली. दवा/ 3 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए।
गुम्मा व्याधि से ग्रस्त बौर को काट कर हटा देना चाहिए। आम के फल जब मटर के दाने के बराबर हो जाये तो सिंचाई प्रारम्भ कर देना चाहिए,उसके पहले बग मै सिंचाई नहीं करना चाहिए अन्यथा फूल झड़ सकते है। फल के मटर के दाने के बराबर है जाने के बाद बाग की मिट्टी को हमेशा नम रहना आवश्यक है अन्यथा फल के झड़ने की सम्भावना बनी रहती है। जहां पर फल मक्खी के समस्या गंभीर हो वहां इसके नियंत्रक के लिए मिथाइल यूजेनॉल फेरोमन ट्रैप 10 ट्रैप / हेक्टेयर की दर से प्रयोग करना चाहिए। आम के बाग के आस-पास यदि ईट के गढ्ढे / बाग की मिट्टी बलुई हो तो आम के फल का निचला हिस्सा काला पड़ जाता है या फल फटने की समस्या पाई जाती है। इसके नियंत्रण के लिए आवश्यक है कि बोरेक्स 10 ग्राम / लीटर का छिड़काव अप्रैल माह के अंत में करना चाहिए। बाग में यदि तना छेदक कीट या पत्ती काटने वाले धुन की समस्या हो तो क्विनालफोस 25 ई.सी. 2 मीली दवा / लीटर पानी मे घोलकर छिड़काव करना चाहिए।
समय समय पर बागों में पोषक तत्व प्रबंधन पर भी ध्यान देना बहुत जरूरी है ।