-स्टेट हाईवे और बड़े पुलों पर टोल वसूली की तैयारी, राजस्थान मॉडल का होगा अध्ययन
मुजफ्फरपुर। बिहार के सभी जिलों में स्टेट हाईवे और 250 मीटर से अधिक लंबे पुलों पर व्यावसायिक वाहनों से टोल टैक्स वसूली की तैयारी तेज हो गई है। इस नई टोल नीति को लागू करने से पहले राजस्थान में संचालित व्यवस्था का अध्ययन किया जाएगा। इसके लिए पथ निर्माण विभाग ने चार सदस्यीय अभियंताओं की टीम गठित की है, जो राजस्थान जाकर वहां लागू लो-कॉस्ट टोल प्लाजा और फास्टैग आधारित इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन सिस्टम का जायजा लेगी।
विभाग के अवर सचिव की ओर से जारी आदेश के अनुसार टीम में बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के उप मुख्य अभियंता संजय कुमार सिंह, सहायक अभियंता अमितेश कुमार, पथ निर्माण विभाग के सहायक अभियंता जगजीत कुमार और बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड के प्रबंधक तकनीकी मयंक राज शामिल हैं। आदेश में बताया गया है कि इस संबंध में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

टीम राजस्थान में टोल वसूली की प्रक्रिया, फास्टैग सिस्टम, टोल दर निर्धारण और प्राप्त राशि के लेखा-जोखा की जानकारी लेगी। वहां के टोल प्लाजा का भ्रमण करने के बाद टीम विभाग को विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर बिहार के लिए टोल नीति का प्रारूप तैयार किए जाने की संभावना है।
मुजफ्फरपुर जिले में स्टेट हाईवे-74 और स्टेट हाईवे-86 के अलावा पिलखी पुल, साहेबगंज के बंगरा घाट पुल और मीनापुर के रघई घाट पुल पर भी टोल वसूली की तैयारी बताई जा रही है।
विभाग के अनुसार स्टेट हाईवे और बड़े पुलों के निर्माण एवं रखरखाव पर हर साल बड़ी राशि खर्च होती है। टोल से प्राप्त राजस्व का उपयोग सड़क मरम्मत और नए पुलों के निर्माण में किए जाने की योजना है। राजस्थान के लो-कॉस्ट मॉडल में बड़े टोल प्लाजा के बजाय कम लागत वाले इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम से फास्टैग के माध्यम से शुल्क वसूला जाता है, जिससे वाहनों को अधिक देर तक रुकना नहीं पड़ता और जाम की स्थिति कम होने की उम्मीद है।












