-वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले और राष्ट्रपति मादुरो की गिरफ्तारी के विरोध में मुजफ्फरपुर में वामदलों का प्रतिवाद मार्च, ट्रंप का पुतला दहन
मुजफ्फरपुर।दीपक कुमार तिवारी।
वेनेजुएला पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में किए गए कथित सैन्य हमले, राजधानी काराकस पर बमबारी तथा अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करते हुए वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार कर अमेरिकी जेल में डाले जाने की घटना के खिलाफ शुक्रवार को मुजफ्फरपुर में वामदलों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान शहर में प्रतिवाद मार्च निकाला गया और कल्याणी चौक पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का पुतला दहन किया गया।
प्रतिवाद मार्च भाकपा-माले जिला कार्यालय, हरिसभा चौक से शुरू होकर शहर के विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए कल्याणी चौक पहुंचा। मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों ने “अमेरिकी साम्राज्यवाद मुर्दाबाद”, “डोनाल्ड ट्रंप मुर्दाबाद”, “वेनेजुएला पर हमला बंद करो”, “राष्ट्रपति मादुरो को रिहा करो”, “अमेरिकी साम्राज्यवाद के खिलाफ वेनेजुएला का संघर्ष जिंदाबाद” जैसे नारे लगाए।
मार्च में भाकपा-माले के जिला सचिव कृष्णमोहन, भाकपा के जिला सचिव रामकिशोर झा, माकपा के जिला सचिव दिनेश भगत, भाकपा-माले राज्य कमेटी सदस्य व किसान नेता जितेंद्र यादव, राज्य कमेटी सदस्य सूरज कुमार सिंह, भाकपा के सुनील ठाकुर व अवधेश पासवान, माकपा की महिला नेत्री कामनी कुमारी, भाकपा-माले कार्यालय प्रभारी विजय गुप्ता, नगर कमेटी सदस्य शहनवाज हुसैन नौशाद, राजकिशोर प्रसाद, इंकलाबी नौजवान सभा के जिला अध्यक्ष विवेक कुमार व राज्य कमेटी सदस्य दीपक कुमार सहित बड़ी संख्या में वामपंथी कार्यकर्ता शामिल हुए।

मार्च को संबोधित करते हुए वाम नेताओं ने कहा कि यह हमला केवल वेनेजुएला के खिलाफ नहीं, बल्कि दुनिया भर के उन सभी देशों और जनता के खिलाफ है जो साम्राज्यवादी दबाव से बाहर रहकर अपना भविष्य स्वयं तय करना चाहते हैं। वक्ताओं ने कहा कि इराक की तरह ही वेनेजुएला के खिलाफ भी झूठे आरोप गढ़े जा रहे हैं ताकि दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाले देश के प्राकृतिक संसाधनों पर कब्ज़ा किया जा सके।
नेताओं ने आरोप लगाया कि तथाकथित “नारको-आतंकवाद” का बहाना बनाकर अमेरिका वेनेजुएला में कठपुतली सरकार थोपना चाहता है और यह पूरा हमला अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हितों की रक्षा के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लैटिन अमेरिका और कैरिबियन क्षेत्र में अमेरिकी हस्तक्षेप का लंबा और खूनी इतिहास रहा है, जिसमें लोकतांत्रिक सरकारों को गिराना और जन आंदोलनों का दमन शामिल है।
वामदलों ने भारत सरकार द्वारा अब तक इस घटना की निंदा न किए जाने पर गहरी चिंता जताई और इसे शर्मनाक बताया। नेताओं ने मांग की कि भारत सरकार तत्काल अमेरिकी आक्रमण की निंदा करे और वेनेजुएला की संप्रभुता व लोकतंत्र के समर्थन में स्पष्ट और ठोस रुख अपनाए।
सभा के अंत में भारत सहित दुनिया भर की लोकतांत्रिक और शांतिप्रिय ताकतों से आह्वान किया गया कि वे साम्राज्यवादी आक्रमण और औपनिवेशिक अधीनता थोपने के प्रयासों के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष करें।












