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बिहार : ‘विकास’ और ‘सामाजिक न्याय’ के दोहरे इंजन पर सवार

-बिहार : ‘विकास’ और ‘सामाजिक न्याय’ के दोहरे इंजन पर सवार

-कनेक्टिविटी: पूर्णिया सहित 8 नए एयरपोर्ट्स का विकास और सड़कों का सुदृढ़ीकरण।
-ऊर्जा: प्रति व्यक्ति बिजली खपत 374 यूनिट तक पहुँची; अब सौर ऊर्जा पर विशेष जोर।
-स्वास्थ्य: जिला अस्पतालों को सुपर स्पेशियलिटी स्तर पर अपग्रेड करना और कैंसर केयर केंद्रों की स्थापना।

आलेख :दीपक कुमार तिवारी।

बिहार के हालिया बजट को देखते हुए यह स्पष्ट है कि राज्य ‘विकास’ और ‘सामाजिक न्याय’ के दोहरे इंजन पर सवार है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तुत किया गया 3.47 लाख करोड़ रुपये का बजट न केवल आकार में विशाल है, बल्कि यह बिहार की बदलती आर्थिक प्राथमिकताओं का एक ठोस दस्तावेज भी है।
​इस बजट की मजबूती और इसकी ‘जन-हितैषी’ प्रकृति का व्यापक विश्लेषण से कई संदर्भ सामने आते हैं।

​बजट की मजबूती: वित्तीय स्थिरता और आर्थिक विकास

​बिहार का बजट अब केवल लोक-लुभावन घोषणाओं का पिटारा नहीं रहा, बल्कि यह राजकोषीय अनुशासन (Fiscal Discipline) का भी प्रमाण है।

​रिकॉर्ड आकार: 3.47 लाख करोड़ का यह बजट बिहार के इतिहास का सबसे बड़ा बजट है, जो राज्य की बढ़ती खर्च करने की क्षमता को दर्शाता है।
​सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP): बिहार की विकास दर राष्ट्रीय औसत को कड़ी टक्कर दे रही है। कर राजस्व (Tax Revenue) में हुई वृद्धि यह बताती है कि राज्य अब आंतरिक संसाधनों से अपनी मजबूती बढ़ा रहा है।

​राजकोषीय घाटा: सरकार ने राजकोषीय घाटे को निर्धारित सीमा (लगभग 3%) के भीतर रखने का प्रयास किया है, जो एक ‘स्ट्रॉन्ग’ इकोनॉमी का संकेत है।

​कितना जन-हितैषी? प्रमुख लाभार्थी और योजनाएं

​इस बजट का हृदय ग्रामीण अर्थव्यवस्था, महिलाएं और युवा हैं। इसे “सात निश्चय-3.0” के विजन के साथ पेश किया गया है।

किसानों के लिए ‘संजीवनी’:

​बजट में कृषि क्षेत्र के लिए क्रांतिकारी बदलाव किए गए हैं।

​जननायक कर्पूरी ठाकुर किसान सम्मान निधि: केंद्र की 6,000 रुपये की राशि के अलावा, बिहार सरकार अब अपनी ओर से 3,000 रुपये अतिरिक्त देगी। यानी अब बिहार के किसानों को सालाना 9,000 रुपये मिलेंगे।

​एग्री-इंफ्रास्ट्रक्चर: कृषि अवसंरचना के लिए 1 लाख करोड़ रुपये के निवेश का रोडमैप तैयार किया गया है, जिसमें कोल्ड स्टोरेज और प्रोसेसिंग यूनिट्स का जाल बिछाया जाएगा।

​महिला सशक्तिकरण: जीविका से व्यवसाय तक
​आर्थिक संबल: जीविका दीदियों के लिए बड़ा ऐलान करते हुए, 10-10 हजार रुपये की प्रारंभिक सहायता पाने वाली महिलाओं को अब अपना व्यवसाय बढ़ाने के लिए 2-2 लाख रुपये तक की सहायता दी जाएगी।

​परिवहन में आरक्षण: बिहार राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण सुनिश्चित किया गया है।

युवाओं के लिए शिक्षा और रोजगार-

​शिक्षा पर सर्वाधिक खर्च: बजट का सबसे बड़ा हिस्सा (लगभग 20% से अधिक) शिक्षा के लिए आवंटित किया गया है।
​स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड: छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने हेतु इस योजना के लिए भारी भरकम बजट रखा गया है।

बुनियादी ढांचा और भविष्य की तैयारी:

​बजट केवल वर्तमान की जरूरतों को पूरा नहीं करता, बल्कि भविष्य की नींव भी रख रहा है।

क्या यह वाकई ‘पूर्ण’ बजट है?​इतनी खूबियों के बाद भी कुछ चुनौतियां बनी हुई हैं:

​क्रियान्वयन (Implementation): बजट में आवंटित राशि का सही समय पर और भ्रष्टाचार मुक्त उपयोग सबसे बड़ी चुनौती है।

​रोजगार सृजन: हालांकि निवेश की बात है, लेकिन संगठित क्षेत्र में बड़े पैमाने पर नौकरियों का सृजन अभी भी एक प्रतीक्षित लक्ष्य है।

​क्षेत्रीय असंतुलन: सीमांचल और कुछ पिछड़े जिलों के निवासियों को लगता है कि उनके क्षेत्रों के लिए विशिष्ट ‘बड़ी सौगात’ की कमी है।

​निष्कर्षत: ​कुल मिलाकर, बिहार का बजट ‘ग्रोथ ओरिएंटेड’ और ‘इंक्लूसिव’ (समावेशी) है। यह कृषि को आधुनिक बनाने (AI युक्त खेती) और ग्रामीण महिलाओं को उद्यमी बनाने का एक साहसिक प्रयास है। यदि योजनाओं का धरातल पर सही तरीके से क्रियान्वयन हुआ, तो यह बजट बिहार को ‘पिछड़े राज्य’ की श्रेणी से निकालकर ‘विकसित राज्यों’ की कतार में खड़ा करने का दम रखता है।