-बिहार में हरित आवरण 6% से बढ़कर 15% हुआ, पर्यावरण संतुलन के साथ तेज होगा विकास: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी
-जनकपुरधाम से देहरादून तक साइकिल यात्रा करने वाले दल से मिले मुख्यमंत्री, जल संरक्षण और नदियों के पुनर्जीवन पर दिया जोर
पटना, 17 अक्टूबर(दीपक तिवारी)। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार में पर्यावरण का संतुलन बनाए रखते हुए विकास कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। जल संरक्षण, वृक्षारोपण, हरित ऊर्जा और जल प्रबंधन सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि विकास की गति को पर्यावरण के साथ जोड़कर संतुलित तरीके से आगे बढ़ाना जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को इसका लाभ मिल सके।
मुख्यमंत्री शनिवार को लोक सेवक आवास स्थित ‘नेक संवाद’ में नेपाल के जनकपुरधाम से उत्तराखंड के देहरादून तक ‘प्रकृति ही प्रभु है’ थीम पर साइकिल यात्रा कर रहे दल से मुलाकात कर रहे थे। पर्यावरणविद् पद्म भूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी के नेतृत्व में पहुंची टीम का उन्होंने स्वागत किया और यात्रा के लिए शुभकामनाएं दीं। यह यात्रा जल संरक्षण, पर्यावरण संवर्द्धन, नदियों के पुनर्जीवन और पर्यावरण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से निकाली जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार-झारखंड विभाजन के बाद राज्य का हरित आवरण क्षेत्र छह प्रतिशत रह गया था, जो अब बढ़कर 15 प्रतिशत हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और दिवंगत सुशील कुमार मोदी के नेतृत्व में पिछले दो दशकों के दौरान जल संरक्षण एवं वृक्षारोपण के क्षेत्र में तेजी से काम किया गया। उन्होंने बताया कि बिहार में सिंचित भूमि का क्षेत्रफल पहले 21 लाख हेक्टेयर था, जो अब बढ़कर 44 लाख हेक्टेयर हो गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष सामान्य से 32 प्रतिशत कम वर्षा होने के बावजूद नेपाल से आने वाले पानी के कारण बिहार में बाढ़ की स्थिति बनी। गंडक, कोसी और गंगा नदियों के पानी का बेहतर प्रबंधन करने के लिए स्थायी योजनाओं पर काम किया जा रहा है। सोन नदी के जल बंटवारे को लेकर बिहार और झारखंड के बीच सहमति बन गई है। सरकार इंद्रपुरी बराज का निर्माण कराने और सोन नदी के पानी को फल्गु नदी से जोड़ने की योजना पर भी काम करेगी।
उन्होंने कहा कि बिहार में ईको टूरिज्म और ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए योजनाएं बनाई गई हैं। जल प्रबंधन के माध्यम से उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर उपयोग करने का प्रयास किया जा रहा है। ग्रामीण सड़कों, बिजली आपूर्ति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के साथ पर्यावरण संरक्षण पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में एक करोड़ 81 लाख महिलाएं स्वरोजगार से जुड़ी हैं और 50 लाख महिलाओं को लखपति दीदी बनाया गया है। इसके साथ ही 60 लाख पशु सखी तैयार करने की दिशा में काम किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक बिहार की सभी महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण से जोड़ना है।
इस अवसर पर पर्यावरणविद् पद्म भूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने बिहार में पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि बिहार पर्यावरण के क्षेत्र में अनूठे तरीके से काम कर रहा है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए उपयोगी साबित होगा। मुख्यमंत्री ने टीम के सदस्यों से पर्यावरण और राज्य के विकास से जुड़े सुझावों का स्वागत करते हुए उनकी यात्रा की सफलता की कामना की।












