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कविता : माई छठ भुखेले, दशहरो भुखेले, जिउतियो भुखेले..

#माई
माई छठ भुखेले
दशहरो भुखेले
जिउतियो भुखेले
सुको भुखेले
सोमार भुखेले
पता ना का भुखेले
केकरा खाती भुखेले?

माई आज ले
अपना खाती ना भूखल
कबो लईका खाती
कबो परिवार खाती
खाली दोसरा खाती

माई भुखेले,काहेकि
ओकरा भुखले में प्रेम बा
भुखले में सुख बा,संसार बा
त्यागे में ओकर जिनगी बा
दोसरे में ओकर आपन बा

आज जिउतिया ना
ओकर जिनगी ह आज
हर बेटा के दिन ह
ओकरा माई खाती
हर माई के दिन ह
ओकरा बेटा खाती

बनल रहस बेटा आ बनल रहस माई
दुनो हाथ जोड़ के जिउतिया के बधाई।

#अनूप