-मासिक कवि गोष्ठी में गूंजे साहित्य, समाज और संवेदना के स्वर
मुजफ्फरपुर। रविवार को अयोध्या प्रसाद खत्री साहित्यिक सेवा संस्थान के तत्वावधान में श्री गांधी पुस्तकालय के सभागार में मासिक कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता भोजपुरी के वरिष्ठ कवि सतेन्द्र कुमार सत्येन ने की, जबकि संचालन कवि एवं पत्रकार प्रमोद नारायण मिश्र ने किया।
कवि गोष्ठी का शुभारंभ कवि डॉ. हरिकिशोर प्रसाद सिंह की रचना “बेटी है घर की शान…” से हुआ। इसके बाद अध्यक्षीय संबोधन में सतेन्द्र कुमार सत्येन ने अपनी भोजपुरी रचना “देवकी जी रोवत बारी कंस के जेलवा, बचिहें कईसे मोर ललनवा…” प्रस्तुत कर श्रोताओं की खूब वाहवाही बटोरी।
कार्यक्रम में कवि ओम प्रकाश गुप्ता ने “कलम सच की जब चलने लगे तो, झूठ को छुपाना मुमकिन नहीं है…” रचना सुनाई। हास्य कवि डॉ. जगदीश शर्मा “दवा दारू वाले” ने “नारी जन जननी बनती मां को करता हूँ प्रणाम…” प्रस्तुत कर माहौल को भावुक बना दिया।

संचालन कर रहे प्रमोद नारायण मिश्र ने “दिल रोता है मैं हंसता हूं, अकेला दुनिया में मैं रहता हूँ…” रचना से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। वहीं गोष्ठी के संयोजक सुमन कुमार मिश्र ने “जिसके चरण शरण स्वर्ग हो वो तो बस माँ होती है…” कविता सुनाई।
इसके अलावा कवि रामवृक्ष राम चकपुरी, अंजनी कुमार पाठक, दीनबंधु आजाद, अरुण कुमार तुलसी, अशोक भारती, अजय कुमार तथा परशुराम ब्याहुत ने अपनी रचनाओं और कविताओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम के अंत में प्रसिद्ध समाजसेवी एवं नागरिक मोर्चा के महासचिव मोहन प्रसाद सिन्हा ने सभी कवियों और श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। वहीं संयोजक सुमन कुमार मिश्र ने धन्यवाद ज्ञापन किया। अध्यक्ष की अनुमति से आगामी आयोजन तक कार्यक्रम स्थगित करने की घोषणा की गई।










