-भागलपुर में चार दिवसीय प्रांतीय प्रधानाचार्य सम्मेलन प्रारंभ
भागलपुर। भारती शिक्षा समिति एवं शिशु शिक्षा प्रबंध समिति के तत्वावधान में आनंदराम ढांढनियाँ सरस्वती विद्या मंदिर में आयोजित चार दिवसीय प्रांतीय प्रधानाचार्य सम्मेलन का उद्घाटन दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। उद्घाटन सत्र में क्षेत्रीय मंत्री रामावतार नारसरिया, रांची केंद्रीय विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. नंद कुमार इंदु, प्रदेश सचिव प्रदीप कुमार कुशवाहा समेत कई गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया।
शिक्षा एवं अनुशासन पर जोर:
रामावतार नारसरिया ने कहा कि प्रधानाचार्य प्रकाश पुंज हैं, जो नवीन उन्नति और स्वरूप प्रदान करते हैं। उन्होंने अनुशासन को सफलता की प्रथम सीढ़ी बताते हुए कहा कि ईमानदारी एवं अनुशासन से ही सफलता प्राप्त की जा सकती है। वहीं, प्रदीप कुमार कुशवाहा ने कहा कि विद्या भारती विश्व में अग्रणी शिक्षा संस्थान है, जो नवाचार एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति को प्रभावी रूप से लागू कर रहा है।

प्रधानाचार्य की भूमिका महत्वपूर्ण:
डॉ. नंद कुमार इंदु ने कहा कि प्रधानाचार्य विद्यालय, आचार्य, अभिभावकों और समाज के साथ समन्वय स्थापित करने की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। उन्हें प्रशासनिक कार्यों एवं कानूनों के प्रति सजग रहने के साथ-साथ एक बेहतरीन प्रबंधक की भूमिका भी निभानी चाहिए।
चार दिवसीय मंथन से निकलेगा अमृत:
सम्मेलन में भागलपुर, गया एवं अन्य विभागों से 225 प्रधानाचार्य शामिल हुए। चार दिवसीय इस सम्मेलन में राष्ट्रीय शिक्षा नीति, नवाचार और विद्यालय प्रबंधन जैसे विषयों पर मंथन होगा, जिसका लाभ प्रतिभागी अपने-अपने विद्यालयों में ले जाएंगे।
#प्रधानाचार्य_सम्मेलन
#विद्या_भारती
#शिक्षा_में_नवाचार
#राष्ट्रीय_शिक्षा_नीति
#अनुशासन_ही_सफलता
















