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नेपाल के मधेश में दूसरे दिन भी जारी रहा प्रदर्शन, कई शहरों में कर्फ्यू, सेना और सुरक्षा बल तैनात

-नेपाल के मधेश में दूसरे दिन भी जारी रहा प्रदर्शन, कई शहरों में कर्फ्यू, सेना और सुरक्षा बल तैनात

जनकपुरधाम/मिश्री लाल मधुकर। नेपाल के मधेश प्रदेश में कांवरिया की हत्या के बाद भड़की हिंसा और विरोध प्रदर्शन शुक्रवार को भी जारी रहे। जनकपुरधाम सहित कई शहरों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। धनुषा जिला प्रशासन ने जनकपुरधाम उपमहानगरपालिका क्षेत्र में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू जारी रखा है, जबकि स्थिति पर नजर रखने के लिए बड़ी संख्या में नेपाल पुलिस, सशस्त्र पुलिस और सेना की तैनाती की गई है।
शुक्रवार को जलेश्वर, गौशाला, बद्रीवास, सबैला, मलंगवा और गौर समेत कई शहरों में विभिन्न हिंदू संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया। भारी सुरक्षा व्यवस्था के कारण इन स्थानों पर किसी बड़ी हिंसक झड़प की सूचना नहीं मिली। वहीं इनरवा, विराटनगर, गोल बाजार, लहान और वीरगंज में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। संवेदनशील इलाकों में सेना की बख्तरबंद गाड़ियां गश्त कर रही हैं तथा हेलीकॉप्टर के माध्यम से भी निगरानी की जा रही है।
गुरुवार रात नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र साह ने राष्ट्र के नाम चार मिनट का मैथिली भाषा में संबोधन जारी कर लोगों से शांति, संयम और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की।

दूसरी ओर गृहमंत्री सुदन गुरूंग ने इनरवा और देवानगंज का दौरा कर मृतक के परिजनों के लिए 10 लाख नेपाली रुपये की सहायता, शहीद का दर्जा, घायलों के समुचित उपचार तथा अन्य प्रशासनिक कदमों की घोषणा की। उन्होंने अवैध मदरसों और मस्जिदों की जांच तथा अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों के विरुद्ध कार्रवाई की भी बात कही।
जनकपुरधाम, गोल बाजार और सिरहा में लोगों की आवश्यक जरूरतों को देखते हुए सुबह 6 बजे से 8 बजे तक कर्फ्यू में ढील दी गई, ताकि नागरिक दूध, सब्जी और किराना का सामान खरीद सकें। एंबुलेंस, मीडिया वाहनों और दवा दुकानों को कर्फ्यू से छूट दी गई है।
अब तक इस हिंसक घटनाक्रम में चार लोगों की मौत और करीब दो दर्जन लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। प्रदर्शन के दौरान कई व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और वाहनों को भी क्षति पहुंचाई गई है।
स्थिति सामान्य करने के प्रयासों के तहत जनकपुरधाम में सर्वदलीय शांति बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ हिंदू, मुस्लिम, बौद्ध और ईसाई समुदाय के धर्मगुरुओं ने भाग लेकर शांति और आपसी सद्भाव बनाए रखने की अपील की।