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वेतनमान और पेंशन देना ही होगा, मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा आंदोलन : सुमित्रा यादव

-वेतनमान और पेंशन देना ही होगा, मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा आंदोलन : सुमित्रा यादव

-वित्तरहित शिक्षाकर्मियों ने गर्दनीबाग में दिया धरना
-सरकार को सौंपा मांगों का ज्ञापन
-लंबित अनुदान का डीबीटी से भुगतान और सेवानिवृत्ति की उम्र 65 वर्ष करने की मांग

पटना/ललितेश्वर। बिहार के वित्तरहित माध्यमिक, इंटरमीडिएट एवं डिग्री शिक्षण संस्थानों के शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों को वेतनमान, पेंशन तथा अन्य सुविधाएं देने की मांग को लेकर बिहार प्रदेश इंटरमीडिएट वित्तरहित संघर्ष मुक्ति मोर्चा के बैनर तले शिक्षाकर्मियों ने पटना के गर्दनीबाग में धरना दिया। धरना के बाद मौके पर पहुंचे सरकारी प्रतिनिधि को अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा गया।
धरना को संबोधित करते हुए मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष प्रोफेसर सुमित्रा कुमारी यादव ने कहा कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। बिहार सरकार को हर हाल में वित्तरहित शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों को वेतनमान देना होगा। वर्षों से लंबित अनुदान राशि का डीबीटी के माध्यम से एकमुश्त भुगतान करना होगा तथा सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पेंशन सहित अन्य सुविधाओं का लाभ देना होगा। उन्होंने सेवानिवृत्ति की उम्र सीमा 60 से बढ़ाकर 65 वर्ष करने की भी मांग की।


प्रो. यादव ने कहा कि अपनी मांगों से प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री को बीते एक सितंबर को पत्र भेजकर अवगत कराया गया था। पत्र में बिहार के वित्तरहित शिक्षाकर्मियों को वेतनमान देने अथवा इच्छामृत्यु की अनुमति देने की गुहार लगाई गई थी। प्रधानमंत्री कार्यालय ने पत्र को संज्ञान में लेते हुए बिहार सरकार को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश भी दिए थे। इसके बावजूद अब तक मांगों पर कोई संतोषजनक निर्णय नहीं लिया गया है और न ही ठोस कार्रवाई की जानकारी दी गई है।
उन्होंने बताया कि सरकार की उदासीनता के कारण संगठन को फिर से लोक शिकायत निवारण प्राधिकार का सहारा लेना पड़ा। बीते 28 अक्टूबर को इस मामले की सुनवाई निर्धारित थी, जिसमें जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) को आवश्यक साक्ष्यों के साथ उपस्थित होना था, लेकिन वे नहीं पहुंचे। इसके बाद सुनवाई की अगली तिथि चार नवंबर निर्धारित की गई है।
प्रदेश अध्यक्ष ने वित्तरहित शिक्षण संस्थानों को मिलने वाले अनुदान के वितरण में अनियमितता की शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि लंबे समय से शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मचारी अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से ठोस पहल नहीं होने के कारण उन्हें धरना-प्रदर्शन के लिए बाध्य होना पड़ा है।
धरना को प्रोफेसर सुमित्रा कुमारी यादव के अलावा प्रोफेसर अनिल कुमार पांडे, उमेश प्रसाद झा, भूपेंद्र प्रसाद सिंह, अखिलेश्वर प्रसाद सिंह, अहमद अली, लक्ष्मण प्रसाद, चंदन कुमार, रामस्वारथ यादव, आशीष कुमार झा, दीनबंधु यादव, मधुसूदन तिवारी और अर्जुन कुमार ने भी संबोधित किया। वक्ताओं ने एकजुट होकर आंदोलन को आगे बढ़ाने का संकल्प जताया।