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गैस विस्फोट ने छीनी घरों की छत, मलबे में दफन हुए सपने और अरमान

-गैस विस्फोट ने छीनी घरों की छत, मलबे में दफन हुए सपने और अरमान

-बेटे की जिंदगी के लिए अस्पताल में जूझ रहा परिवार, तभी उजड़ गया मंजू गुप्ता का आशियाना

-अगले महीने बेटी की शादी, दो करोड़ का मकान बना खंडहर; दुकानों में रखा लाखों का सामान बर्बाद

-रीतलाल कॉलेज रोड तक महसूस हुआ धमाके का असर, महिला समेत कई लोग हुए प्रभावित

मुजफ्फरपुर। जिंदगी जब एक साथ कई इम्तिहान लेने लगती है, तो इंसान के पास आंसू बहाने तक की फुर्सत नहीं बचती। शहर के गोबरसही-डुमरी इलाके में हुए पीएनजी गैस पाइपलाइन विस्फोट ने कई परिवारों की जिंदगी में ऐसा अंधेरा भर दिया है, जिसकी भरपाई शायद कभी नहीं हो सकेगी। किसी का आशियाना उजड़ गया, किसी की जीवनभर की कमाई मलबे में दब गई, तो किसी के घर में आने वाली खुशियां अचानक मातम और मायूसी में बदल गईं। इस हादसे ने सिर्फ मकानों और दुकानों को ही नुकसान नहीं पहुंचाया, बल्कि कई परिवारों के सपनों, उम्मीदों और भविष्य को भी गहरी चोट पहुंचाई है।

बेटा अस्पताल में जिंदगी से जूझ रहा, इधर उजड़ गया आशियाना:

इस त्रासदी की सबसे मार्मिक तस्वीर मंजू गुप्ता के परिवार की है। उनका बेटा पटना के एक अस्पताल में ब्रेन हेमरेज के बाद आईसीयू में भर्ती है। परिवार पहले से ही बेटे की सलामती को लेकर परेशान था। उसकी जिंदगी बचाने के लिए पूरा परिवार अस्पताल में दुआएं मांग रहा था। इसी बीच गैस पाइपलाइन विस्फोट ने उनके घर को भी तबाह कर दिया। तेज धमाके से मकान की दीवारें ढह गईं और दरवाजे उखड़ गए। घर में रखी जीवनभर की गृहस्थी मलबे में तब्दील हो गई। एक तरफ अस्पताल में भर्ती बेटे की चिंता और दूसरी तरफ उजड़े आशियाने का दर्द मंजू गुप्ता के परिवार पर दोहरी मुसीबत बनकर टूट पड़ा है।

धमाके की गूंज रीतलाल कॉलेज रोड तक, महिला का चेहरा हुआ जख्मी:

विस्फोट की भयावहता घटनास्थल से काफी दूर रीतलाल कॉलेज रोड तक महसूस की गई। धमाके के तेज झटके से अजीत कुमार के मकान की खिड़कियों के शीशे चकनाचूर होकर बिखर गए। कांच के टुकड़ों की चपेट में आने से उनकी पत्नी का चेहरा जख्मी हो गया। उन्हें तत्काल एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना ने आसपास के लोगों को भी दहशत में डाल दिया।

दुकानें ध्वस्त, कारोबार के साधन भी मलबे में दबे:

विस्फोट का असर सड़क किनारे अपनी छोटी-छोटी दुकानों के सहारे परिवार चलाने वाले कारोबारियों पर भी पड़ा। शंकर पासवान की जनरल स्टोर और राजेश कुमार की शृंगार दुकान पूरी तरह ध्वस्त हो गई। प्रभात कुमार की ऑटो स्पेयर पार्ट्स दुकान को भी भारी नुकसान पहुंचा। वहीं, ऋतिक राज के साइबर कैफे की छत गिरने से कंप्यूटर, प्रिंटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बर्बाद हो गए। इसके अलावा पैथ लैब और कई फास्ट फूड आउटलेट्स भी विस्फोट की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हो गए। छोटे कारोबारियों के सामने अब रोजी-रोटी और दोबारा कारोबार शुरू करने की चुनौती खड़ी हो गई है।

अगले महीने बेटी की शादी, दो करोड़ का आशियाना बना खंडहर:

इस हादसे ने प्रमोद कुमार के परिवार की खुशियों को भी गहरे सदमे में बदल दिया। घटनास्थल के ठीक सामने उनका दो मंजिला मकान था। प्रमोद ने अपने भाइयों अमोद और जितेंद्र के साथ मिलकर करीब दो करोड़ रुपये की लागत से बड़े अरमानों के साथ इस मकान का निर्माण कराया था। घर में अगले महीने बेटी की शादी होनी थी। शादी की तैयारियां चल रही थीं और परिवार में खुशियों का माहौल था। लेकिन गैस विस्फोट के एक झटके ने पूरे मकान और नीचे संचालित दुकान को मलबे में बदल दिया। हालांकि, गैस रिसाव की गंध महसूस होते ही परिवार के सभी सदस्य समय रहते घर से बाहर निकल गए थे। इससे उनकी जान बच गई, लेकिन वर्षों की मेहनत से खड़ा किया गया आशियाना उजड़ गया।

दिवाली-छठ से पहले दुकानदारों पर टूटा आर्थिक संकट:

त्योहारों का मौसम कारोबारियों के लिए कमाई की उम्मीद लेकर आता है, लेकिन इस हादसे ने कई दुकानदारों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। दिवाली और छठ को देखते हुए अरुण वस्त्रालय समेत आसपास की करीब आधा दर्जन दुकानों में नया स्टॉक मंगाया गया था। दुकानों में कपड़े, सजावटी सामान और अन्य उत्पाद भरे हुए थे। लेकिन विस्फोट के कारण कांच के गेट, रैक और नए कपड़े पूरी तरह बर्बाद हो गए। अरुण वस्त्रालय के संचालक अरुण कुमार गुप्ता और मुन्ना कुमार ने बताया कि त्योहारों को लेकर लाखों रुपये का सामान जुटाया गया था। उन्हें उम्मीद थी कि पर्व के दौरान अच्छा कारोबार होगा, लेकिन एक झटके में उनकी पूंजी और कमाई की उम्मीदें दोनों खत्म हो गईं।

एक धमाका, कई परिवारों की जिंदगी बदल गई:

गोबरसही-डुमरी इलाके में हुआ यह विस्फोट केवल एक औद्योगिक या तकनीकी हादसा भर नहीं है, बल्कि इससे प्रभावित परिवारों के लिए जिंदगी का सबसे कठिन दौर बन गया है। किसी को इलाज की चिंता है, किसी को बच्चों के भविष्य की, तो किसी के सामने दोबारा घर और कारोबार खड़ा करने की चुनौती है। दिवाली और छठ जैसे बड़े पर्व से ठीक पहले हुई इस त्रासदी ने कई परिवारों की खुशियां छीन ली हैं। अब पीड़ितों को प्रशासनिक सहायता, उचित मुआवजे और पुनर्वास की उम्मीद है, ताकि वे इस बड़े सदमे से उबरकर फिर से अपनी जिंदगी को पटरी पर ला सकें।