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जल-जीवन-हरियाली अभियान: मुजफ्फरपुर में 1500 तालाब-पोखरों का हुआ जीर्णोद्धार

-जल-जीवन-हरियाली अभियान: मुजफ्फरपुर में 1500 तालाब-पोखरों का हुआ जीर्णोद्धार

-23.19 लाख पौधे लगाए गए
-जिले में 221 सार्वजनिक जल संरचनाएं और 391 कुएं कराए गए अतिक्रमणमुक्त, 456 भवनों में लगे सौर ऊर्जा संयंत्र
-जिलाधिकारी कुमार गौरव ने कहा- पर्यावरण संरक्षण और ग्लोबल वार्मिंग रोकने के लिए जनभागीदारी जरूरी

मुजफ्फरपुर। जल एवं हरियाली के बिना जीवन की कल्पना संभव नहीं है। जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरणीय असंतुलन की बढ़ती चुनौतियों के बीच जल संरक्षण एवं हरित क्षेत्र का विस्तार समय की सबसे बड़ी जरूरत है। इसके लिए सरकार द्वारा संचालित जल-जीवन-हरियाली अभियान को जनभागीदारी के माध्यम से जनआंदोलन का रूप देना होगा। मंगलवार को समाहरणालय स्थित सभाकक्ष में आयोजित जल-जीवन-हरियाली दिवस के अवसर पर वक्ताओं ने ये बातें कहीं।
सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, बिहार सरकार के तत्वावधान में जिलाधिकारी कुमार गौरव के निर्देश पर जिला प्रशासन की ओर से कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान ‘जल-जीवन-हरियाली : जन-जागरूकता से सतत विकास की ओर सामूहिक पहल’ विषय पर विस्तृत परिचर्चा हुई। इसमें विभिन्न विभागों के अधिकारियों एवं प्रतिनिधियों ने पर्यावरण संरक्षण, जल संचयन, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और अभियान की उपलब्धियों पर अपने विचार रखे।
जिलाधिकारी कुमार गौरव ने जिलेवासियों के नाम जारी संदेश में कहा कि बिहार की पारिस्थितिकीय चुनौतियों और पर्यावरण में हो रहे बदलाव को देखते हुए सरकार ने जल-जीवन-हरियाली अभियान की शुरुआत की है। इसकी सफलता सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। जल है तभी जीवन है और हरियाली है तभी पर्यावरण सुरक्षित रह सकता है। इसलिए सभी संबंधित विभागों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों को इस अभियान के प्रति संवेदनशील एवं सक्रिय रहना होगा।
उन्होंने कहा कि अभियान के तहत निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए जिले में लगातार काम किया जा रहा है। इसके 11 अवयवों पर 15 क्रियान्वयन विभागों के आपसी समन्वय से कार्य हो रहे हैं। सार्वजनिक तालाबों, पोखरों, आहर-पईन और कुओं का जीर्णोद्धार, जल संरचनाओं को अतिक्रमणमुक्त करना, सोख्ता एवं रिचार्ज संरचनाओं का निर्माण, छत वर्षा जल संचयन, पौधारोपण, जैविक खेती, टपकन सिंचाई और सौर ऊर्जा को बढ़ावा देना इसमें शामिल है।


जिलाधिकारी ने कहा कि अभियान के तहत जिले में हो रहे कार्यों से पर्यावरण संरक्षण के साथ सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को भी बढ़ावा मिल रहा है। जीविका के माध्यम से भी कई गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। तालाबों में मत्स्य पालन और बत्तख पालन से लोगों की आमदनी बढ़ रही है। इस प्रकार यह अभियान केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि महिला सशक्तिकरण, आजीविका संवर्धन और सामाजिक जागरूकता का भी माध्यम बन रहा है। आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर पर्यावरण सुनिश्चित करने को जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों के प्रति हम सभी को प्रतिबद्ध होना पड़ेगा।
कार्यक्रम में जिला प्रशासन की ओर से अभियान की अद्यतन उपलब्धियों की जानकारी भी दी गई। इसके अनुसार जिले में 221 सार्वजनिक जल संचयन संरचनाओं और 391 सार्वजनिक कुओं को चिह्नित कर पूरी तरह अतिक्रमणमुक्त कराया गया है। सार्वजनिक तालाबों, पोखरों, आहर और पईन के जीर्णोद्धार के लिए शुरू किए गए सभी 1500 कार्य पूरे कर लिए गए हैं। सार्वजनिक कुओं के जीर्णोद्धार के 1048 कार्यों में से 1046 पूरे हो चुके हैं, जबकि दो कार्य प्रक्रियाधीन हैं।
इसी तरह सार्वजनिक चापाकलों के किनारे 13,558 सोख्ता निर्माण कार्य शुरू किए गए, जिनमें 13,554 पूरे हो चुके हैं। सार्वजनिक कुओं के किनारे सोख्ता निर्माण के सभी 988 कार्य पूरे कर लिए गए हैं। चेक डैम एवं जल संचयन की अन्य संरचनाओं के निर्माण के लिए शुरू किए गए 43 कार्यों में 30 पूरे हुए हैं, जबकि 13 पर काम जारी है। नए जल स्रोतों के सृजन के तहत 6090 कार्य शुरू किए गए, जिनमें 6075 पूरे हो चुके हैं।
सरकारी भवनों में छत वर्षा जल संचयन की दिशा में भी जिले ने प्रगति की है। इसके तहत 948 भवनों में कार्य शुरू किए गए, जिनमें 940 में काम पूरा हो चुका है। सघन वृक्षारोपण अभियान के तहत जिले में अब तक 23.19 लाख से अधिक पौधे लगाए गए हैं। वहीं, 9614.87 एकड़ भूमि जैविक कृषि और 2525.42 एकड़ भूमि टपकन सिंचाई के दायरे में लाई गई है। इसके अतिरिक्त 456 भवनों में सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए गए हैं।
कार्यक्रम में जिला जनसंपर्क पदाधिकारी ने जल-जीवन-हरियाली अभियान के उद्देश्यों, विभिन्न योजनाओं, पर्यावरण पर इसके प्रभाव और राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी प्रासंगिकता के बारे में विस्तार से जानकारी दी। विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने विभाग की ओर से जिले में किए जा रहे कार्यों का ब्योरा प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर सिविल सर्जन, जिला पंचायत राज पदाधिकारी, जिला वन पदाधिकारी, जिला कृषि पदाधिकारी, जल संसाधन विभाग, लघु जल संसाधन विभाग, विद्युत विभाग, भवन निर्माण विभाग, शिक्षा विभाग, जीविका, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग, मत्स्य विभाग सहित अन्य विभागों के अधिकारी एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि जल-जीवन-हरियाली अभियान के प्रति आम लोगों को जागरूक करने के लिए गांव-गांव में नियमित रूप से उन्मुखीकरण कार्यशालाएं आयोजित की जाएं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति सामूहिक दृढ़ संकल्प और जनभागीदारी से ही आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, सुरक्षित और संतुलित प्राकृतिक वातावरण तैयार किया जा सकता है।