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मालीघाट में मोमबत्ती फैक्ट्री में भीषण आग, संचालक झुलसे

-मालीघाट में मोमबत्ती फैक्ट्री में भीषण आग, संचालक झुलसे

-सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
-दमकल पहुंचने में देरी, घरेलू गैस सिलेंडर के इस्तेमाल और बाल श्रम के आरोपों की जांच जरूरी

मुजफ्फरपुर। शहर के मालीघाट नाका रोड स्थित एक मोमबत्ती फैक्ट्री में लगी भीषण आग ने औद्योगिक इकाइयों की सुरक्षा व्यवस्था और अग्निशमन विभाग की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आग बुझाने की कोशिश के दौरान फैक्ट्री संचालक दीपक कुमार के झुलसने की जानकारी सामने आई है। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने दमकल की गाड़ी पहुंचने में कथित देरी, घरेलू गैस सिलेंडर के इस्तेमाल और फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर सवाल उठाए हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार, मोमबत्ती बनाने में इस्तेमाल होने वाले ज्वलनशील पैराफिन मोम के कारण आग तेजी से फैल गई। देखते ही देखते आग ने फैक्ट्री के बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया। आग की ऊंची लपटें उठने के बाद आसपास के इलाके में अफरातफरी मच गई और लोगों में दहशत फैल गई। इसी दौरान आग बुझाने की कोशिश में फैक्ट्री संचालक दीपक कुमार के झुलसने की बात सामने आई है। हालांकि, उनकी चोटों की गंभीरता और इलाज से संबंधित विस्तृत जानकारी की पुष्टि नहीं हो सकी है।

घटना के बाद फैक्ट्री में व्यावसायिक सिलेंडर के बजाय घरेलू गैस सिलेंडर इस्तेमाल किए जाने का आरोप भी स्थानीय स्तर पर लगाया जा रहा है। गैस सिलेंडर में आग लगने और विस्फोट की आशंका भी जताई गई है। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। आग लगने के वास्तविक कारणों का पता जांच के बाद ही चल सकेगा।

फैक्ट्री में छोटे बच्चों से काम कराए जाने का आरोप भी सामने आया है। यदि जांच में बाल श्रम की पुष्टि होती है, तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि घटनास्थल से करीब आधा किलोमीटर की दूरी पर अग्निशमन विभाग का कार्यालय है। इसके बावजूद दमकल की गाड़ी को मौके पर पहुंचने में आधे घंटे से अधिक समय लगने का दावा किया जा रहा है। लोगों ने सवाल उठाया है कि इतनी कम दूरी होने के बावजूद दमकल की गाड़ी पहुंचने में देरी क्यों हुई। हालांकि, सूचना मिलने और दमकल के घटनास्थल पर पहुंचने के वास्तविक समय की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में विभाग की प्रतिक्रिया और भूमिका का आकलन संबंधित तथ्यों की पुष्टि के बाद ही किया जा सकता है।

फैक्ट्री में अग्निशमन उपकरणों, आपातकालीन निकास और अन्य सुरक्षा इंतजामों की स्थिति भी स्पष्ट नहीं है। इकाई के पास अग्निशमन विभाग की अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) थी या नहीं, इसकी भी आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में फैक्ट्री के दस्तावेजों, गैस सिलेंडरों के इस्तेमाल और सुरक्षा मानकों के अनुपालन की जांच जरूरी मानी जा रही है।

मालीघाट नाका रोड के आसपास गैस गोदाम होने की बात भी स्थानीय लोगों ने कही है। ऐसे संवेदनशील इलाके में ज्वलनशील सामग्री से जुड़ी इकाइयों की सुरक्षा व्यवस्था की नियमित जांच महत्वपूर्ण है। यदि आग आसपास की दूसरी इकाइयों तक फैलती, तो नुकसान और अधिक हो सकता था।

घटना के बाद फैक्ट्री की सुरक्षा व्यवस्था, गैस सिलेंडरों के इस्तेमाल, दमकल की प्रतिक्रिया और आवश्यक अनुमतियों की जांच की मांग उठ रही है। संबंधित विभागों की जांच से ही आग लगने के कारणों और सुरक्षा संबंधी आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। साथ ही, आसपास की संवेदनशील औद्योगिक इकाइयों का सुरक्षा ऑडिट भविष्य में ऐसे हादसों का जोखिम कम करने में मददगार हो सकता है।