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-मां पीतांबरी बगलामुखी सिद्धपीठ में हल्दी-दही चढ़ाने की अनूठी परंपरा, हर गुरुवार उमड़ते हैं श्रद्धालु

-मां पीतांबरी बगलामुखी सिद्धपीठ में हल्दी-दही चढ़ाने की अनूठी परंपरा, हर गुरुवार उमड़ते हैं श्रद्धालु

-करीब 250 वर्ष पुराना है मंदिर का इतिहास, विवाह, नौकरी, कारोबार में तरक्की और ग्रह शांति की कामना लेकर पहुंचते हैं भक्त

मुजफ्फरपुर। पीली हल्दी, दही और मन में मनोकामना पूरी होने की आस। मुजफ्फरपुर के कच्ची सराय रोड स्थित मां पीतांबरी बगलामुखी सिद्धपीठ में हर गुरुवार को आस्था का ऐसा ही नजारा देखने को मिलता है। कोई ग्रह शांति की कामना लेकर माता के दरबार में पहुंचता है, तो कोई विवाह, नौकरी, कारोबार में तरक्की और परिवार में सुख-शांति की प्रार्थना करता है। श्रद्धालु माता को हल्दी और दही अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। करीब 250 वर्ष पुराने इस मंदिर की धार्मिक परंपराएं और तांत्रिक साधना के लिए इसकी पहचान इसे विशेष बनाती हैं।

मंदिर की स्थापना करीब 250 वर्ष पुरानी बताई जाती है। मान्यता के अनुसार, महंत देवराज के पूर्वज ने कलकत्ता के कारीगरों से मां बगलामुखी की प्रतिमा का निर्माण कराया था। वर्ष 1993-94 में मंदिर को वर्तमान स्वरूप देने की दिशा में नींव रखी गई। मंदिर के गर्भगृह में अष्टधातु से निर्मित मां बगलामुखी की दस भुजाओं वाली प्रतिमा स्थापित है। माता पंच प्रेतासन पर विराजमान हैं। श्रद्धालु यहां पहुंचकर माता के दर्शन करते हैं और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करते हैं।

मां बगलामुखी के दरबार में हल्दी और दही अर्पित करने की विशेष परंपरा है। श्रद्धालु ग्रहों की शांति, विवाह में आ रही बाधाओं से मुक्ति, नौकरी में सफलता, व्यवसाय में उन्नति और परिवार में सुख-शांति की कामना लेकर पहुंचते हैं। मंदिर परिसर में मनोकामना के लिए धागा बांधने की परंपरा भी है। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि माता के दरबार में सच्चे मन से प्रार्थना करने पर उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। मन्नत पूरी होने पर भक्त हल्दी, दही, प्रसाद और नारियल अर्पित करते हैं।

धार्मिक साधना और तांत्रिक अनुष्ठानों के लिए भी यह सिद्धपीठ अपनी अलग पहचान रखता है। मंदिर में वाम मार्ग और दक्षिण मार्ग, दोनों पद्धतियों से पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता के अनुसार, माता के गर्भगृह के नीचे सहस्रदल महायंत्र स्थापित है। यहां प्रतिदिन सुबह और शाम आरती होती है। ग्रह शांति और मनोकामना की पूर्ति के लिए श्रद्धालु हवन और मंत्र जाप भी कराते हैं।

मंदिर परिसर में मां बगलामुखी के अलावा मां त्रिपुर सुंदरी, मां तारा, काल भैरव, भोले बाबा, ब्रह्म बाबा, काली माई और हनुमान जी के भी दर्शन किए जा सकते हैं। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए पहुंचते हैं।

मंदिर के महंत देवराज ने बताया कि मां पीतांबरी बगलामुखी के दरबार में हल्दी और दही चढ़ाने की विशेष परंपरा है। श्रद्धालु प्रेत बाधा से मुक्ति, ग्रह शांति, शादी-विवाह, नौकरी, व्यवसाय में उन्नति और पारिवारिक सुख-शांति की कामना लेकर आते हैं। वहीं, पुजारी देवनारायण मिश्र के अनुसार, मंदिर में विभिन्न देवी-देवताओं के दर्शन के साथ श्रद्धालु अपनी मनोकामना के लिए धागा बांधते हैं और संकल्प लेकर पूजा-अर्चना कराते हैं।

मां पीतांबरी बगलामुखी सिद्धपीठ मुजफ्फरपुर रेलवे स्टेशन से करीब दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। रामदयालु बस स्टैंड से मंदिर लगभग तीन किलोमीटर और भगवानपुर बस स्टैंड से करीब चार किलोमीटर दूर है। श्रद्धालु रिक्शा, ऑटो या निजी वाहन से आसानी से मंदिर पहुंच सकते हैं।