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जनकपुरधाम में बलि प्रथा के विरोध में प्रवचन और कवि गोष्ठी आयोजित

-जनकपुरधाम में बलि प्रथा के विरोध में प्रवचन और कवि गोष्ठी आयोजित

-संत आदर्श साहेब ने बलि प्रथा को बताया अंधविश्वास, जीवों के प्रति दया और अहिंसा का दिया संदेश

जनकपुरधाम/मिश्री लाल मधुकर। दशहरा के अवसर पर बलि प्रथा के विरोध में बलि प्रथा उन्मूलन अभियान समिति, धनुषा, जनकपुरधाम की ओर से प्रवचन और कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। जनकपुरधाम के जनक चौक पर आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता अभियान समिति के अध्यक्ष एवं श्री कबीर आश्रम, जनकपुरधाम के चेयरमैन संत श्री सत्यनारायण ‘आलोक’ ने की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री कबीर आश्रम, बनेश्वर, काठमांडू के प्रमुख संत श्री आदर्श साहेब थे।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि संत आदर्श साहेब ने अपने प्रवचन में जीवों के प्रति दया, अहिंसा और धार्मिक आस्था के वास्तविक अर्थ पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि किसी भी जीव की हत्या और हिंसा करना उचित नहीं है। धार्मिक मान्यताओं का उद्देश्य सभी जीवों के जीवन और कल्याण की रक्षा करना है। मनुष्य को अपनी आस्था और विश्वास के साथ-साथ सभी प्राणियों के प्रति करुणा का भाव भी रखना चाहिए।

संत आदर्श साहेब ने कहा कि लोग अपनी सुख-शांति और कल्याण की कामना के लिए विभिन्न त्योहार मनाते हैं तथा देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना करते हैं। ऐसे में पशुओं की बलि देने की प्रथा पर विचार करने की जरूरत है। उन्होंने बलि प्रथा को अंधविश्वास बताते हुए कहा कि इसके खिलाफ जनजागरूकता अभियान चलाना आवश्यक है। धर्म के वास्तविक स्वरूप को समझते हुए हिंसा से दूर रहना और जीवों के प्रति संवेदनशीलता अपनाना चाहिए।

इस अवसर पर संत सत्यनारायण ‘आलोक’, राम सागर पंडित, योग गुरु विमल पंडित, विपत्ति मंडल मानव और भोगेंद्र लाल कर्ण सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम के दौरान कवि गोष्ठी का भी आयोजन किया गया, जिसमें कविता पाठ के माध्यम से बलि प्रथा के विरोध और अहिंसा का संदेश दिया गया।

आयोजकों ने बताया कि पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी दशहरा के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित करने का उद्देश्य समाज में बलि प्रथा के प्रति जागरूकता बढ़ाना और लोगों को जीवों के प्रति दया तथा करुणा का भाव अपनाने के लिए प्रेरित करना है। कार्यक्रम में धार्मिक आस्था के साथ मानवता, अहिंसा और जीवों की रक्षा का संदेश दिया गया।