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बाबा खगेश्वरनाथ धाम को पर्यटन मानचित्र पर लाने की मांग, समाजसेवी ने मुख्यमंत्री को भेजा प्रार्थना पत्र

-बाबा खगेश्वरनाथ धाम को पर्यटन मानचित्र पर लाने की मांग, समाजसेवी ने मुख्यमंत्री को भेजा प्रार्थना पत्र

मुजफ्फरपुर/बंदरा(दीपक )। जिले के बन्दरा प्रखंड के समाजसेवी श्याम किशोर ने मुख्यमंत्री, पर्यटन मंत्री तथा स्थानीय गायघाट विधायक को प्रार्थना पत्र भेजकर बाबा खगेश्वरनाथ धाम, मतलुपुर (बंदरा) को राज्य के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थलों में विकसित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि इस ऐतिहासिक धाम को पर्यटन मानचित्र पर विकसित किया जाता है, तो यह केवल एक धार्मिक केंद्र ही नहीं रहेगा, बल्कि पूरे क्षेत्र की आर्थिक प्रगति का आधार बनेगा।
अपने पत्र में श्याम किशोर ने उल्लेख किया है कि पर्यटन के विकास से हजारों लोगों के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार एवं आजीविका के नए अवसर सृजित होंगे। उन्होंने कहा कि ढोली रेलवे स्टेशन श्रद्धालुओं और पर्यटकों का प्रमुख प्रवेश द्वार बन सकता है, जबकि प्रस्तावित रतवारा–ढोली घाट पुल मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, दरभंगा, सीतामढ़ी समेत आसपास के जिलों के लिए जीवनरेखा साबित होगा। इससे आवागमन आसान होगा, व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।


उन्होंने बताया कि पर्यटन के विस्तार से ढोली, रतवारा और बंदरा क्षेत्र में होटल, धर्मशाला, रेस्टोरेंट, परिवहन सेवाएं, हस्तशिल्प एवं स्थानीय उत्पादों की दुकानें सहित अनेक छोटे-बड़े व्यवसाय विकसित होंगे। इससे स्थानीय युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार मिलेगा और गांवों के आर्थिक व सामाजिक विकास को नई दिशा मिलेगी।
श्याम किशोर ने यह भी कहा कि प्रस्तावित पर्यटन सर्किट के माध्यम से श्रद्धालु बाबा खगेश्वरनाथ धाम के साथ-साथ सिद्ध शक्ति पीठ चामुंडा स्थान (कटरा–गायघाट), भरवाड़ा (जाले) स्थित बउआ साहेब का कबीर मठ, अहिल्या स्थान एवं गौतम ऋषि आश्रम (दरभंगा), माता सीता मंदिर (सीतामढ़ी), बाबा गरीबनाथ धाम (मुजफ्फरपुर) तथा वैशाली में भगवान बुद्ध एवं भगवान महावीर से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों का भी सहज दर्शन कर सकेंगे।
उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि पर्यटन और आधारभूत संरचना के विकास की ठोस पहल की जाए। साथ ही स्थानीय समाज भी अतिथि सत्कार और आवश्यक सुविधाओं के विकास में सक्रिय भागीदारी निभाए। उनका कहना है कि सरकार और समाज के संयुक्त प्रयास से बंदरा क्षेत्र उत्तर बिहार का एक प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र बन सकता है।