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‘निशांत’ मिशन ‘मुख्यमंत्री’ का बन सकते हैं हिस्सा

-‘निशांत’ मिशन ‘मुख्यमंत्री’ का बन सकते हैं हिस्सा

-नीतीश कुमार के बेटे निशांत की राजनीति में एंट्री के संकेत

पटना। दीपक कुमार तिवारी।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के राजनीति में उतरने की अटकलें अब लगभग तय मानी जा रही हैं। इंजीनियर की भूमिका निभा चुके निशांत कुमार अब अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत करने जा रहे हैं। हालांकि, उनकी प्रारंभिक भूमिका क्या होगी, इस पर अभी सस्पेंस बना हुआ है। लेकिन इतना साफ है कि वे अपनी राजनीतिक विरासत को संवारने के लिए मिशन मुख्यमंत्री का हिस्सा बनने की ओर बढ़ रहे हैं।

राजनीति में लाने के पीछे कौन हैं ‘गुरु द्रोणाचार्य’?

राजनीति से दूर रहने वाले निशांत कुमार के राजनीतिक सफर की तैयारी में कई ‘गुरु द्रोणाचार्य’ वर्षों से प्रयासरत थे। राजनीतिक गलियारों की मानें तो इस दिशा में पहला प्रयास लालू प्रसाद यादव ने किया था। लालू यादव ने कभी पक्ष में रहते हुए तो कभी विपक्ष में रहकर नीतीश कुमार को निशांत को राजनीति में लाने की सलाह दी थी।

2015 के विधानसभा चुनाव के दौरान लालू यादव ने इस मुद्दे पर काफी जोर दिया था, लेकिन तब नीतीश कुमार ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।

वशिष्ठ नारायण सिंह और आरसीपी सिंह के प्रयास:

पूर्व प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह भी निशांत को राजनीति में लाना चाहते थे। 2010 के विधानसभा चुनाव के समय उन्होंने निशांत को चुनाव लड़ाने का प्रयास किया था, लेकिन उस समय निशांत ने खुद को राजनीति से दूर रखा था क्योंकि वे तब अध्यात्म में रुचि ले रहे थे।

वहीं, पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह ने भी लगातार संगठन के जरिए निशांत को राजनीति में लाने की कोशिशें की थीं। लेकिन इससे पहले कि उनके प्रयास रंग लाते, आरसीपी सिंह को जदयू से विदाई लेनी पड़ी।

आईएएस मनीष वर्मा का भी नाम चर्चा में:

पूर्व आईएएस अधिकारी मनीष वर्मा के समय से पहले अवकाश लेने को भी निशांत को राजनीति में उतारने की योजना से जोड़ा गया था। हालांकि, इस प्रयास में वे कितने सफल हुए, यह स्पष्ट नहीं हो सका।

तस्वीर ने दिए पुख्ता संकेत:

हाल ही में एक तस्वीर ने इन अटकलों को और बल दिया, जिसमें निशांत कुमार को जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और मंत्री विजय चौधरी के कंधे पर दोस्ताना अंदाज में हाथ रखे हुए देखा गया। इस तस्वीर को राजनीतिक गलियारों में इस तरह देखा जा रहा है कि जैसे दो वरिष्ठ नेताओं को अंततः निशांत को राजनीति में लाने में सफलता मिल ही गई हो।

2025 चुनाव में अहम भूमिका के संकेत:

अब सवाल यह है कि क्या 2025 के विधानसभा चुनाव में निशांत कुमार को कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जाएगी या वे संगठन के कार्यों में भूमिका निभाएंगे। राजनीति में उनकी एंट्री के साथ बिहार की सियासत में नए समीकरण बन सकते हैं।