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‘नदी संजीवनी’ से बदलेगी बिहार की तस्वीर, नदियों की गाद से बनेंगी सड़कें

-‘नदी संजीवनी’ से बदलेगी बिहार की तस्वीर, नदियों की गाद से बनेंगी सड़कें

-बाढ़ नियंत्रण और सिंचाई को मिलेगी मदद
-केंद्र और बिहार सरकार के बीच ऐतिहासिक एमओयू
-243 लाख घनमीटर गाद का 16 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में होगा उपयोग

पटना। दीपक कुमार तिवारी/शालिनी तिवारी) । बिहार की नदियों में जमा गाद (सिल्ट) अब विकास का नया संसाधन बनेगी। नदियों से गाद निकालकर उसका उपयोग राष्ट्रीय राजमार्गों एवं अन्य आधारभूत संरचना परियोजनाओं के निर्माण में किया जाएगा। इसके लिए मंगलवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की मौजूदगी में केंद्र सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय तथा बिहार सरकार के बीच ‘नदी संजीवनी’ कार्यक्रम के तहत समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।
इस पहल का उद्देश्य नदियों एवं अन्य जलस्रोतों से वैज्ञानिक तरीके से गाद निकालना, जलस्रोतों का पुनर्जीवन करना और निकाली गई गाद का उपयोग सड़क निर्माण में करना है। इस समझौते के तहत 243 लाख घनमीटर गाद का उपयोग 16 चालू राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में किया जाएगा। इससे प्राकृतिक ऊपरी मिट्टी के दोहन में भी कमी आएगी। बिहार सरकार ने इसके लिए बिहार जलस्रोत पुनरुद्धार एवं गाद प्रबंधन नीति-2026 लागू की है। इस नीति को लागू करने वाला बिहार देश का पहला राज्य बताया गया है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार की दो प्रमुख चुनौतियां अधिक आबादी और अनियंत्रित जल प्रवाह रही हैं। अब इन्हें विकास की ताकत में बदला जाएगा। नेपाल में भारी बारिश और दूसरे राज्यों से आने वाले पानी के कारण बिहार को हर साल बाढ़ की समस्या का सामना करना पड़ता है। वहीं, फरक्का बैराज के कारण गंगा नदी में गाद जमा होने की समस्या भी गंभीर है। नदियों से गाद निकालने और उनके पुनर्जीवन से जलधारण एवं जलप्रवाह क्षमता में सुधार होगा। इससे बाढ़ के प्रभाव को कम करने, किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने और कृषि को मजबूती देने में मदद मिलेगी।


मुख्यमंत्री ने कहा कि नदियों से निकाली गई गाद अब बेकार सामग्री नहीं, बल्कि बिहार की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाला संसाधन बनेगी। एनएचएआई को जहां भी गाद की आवश्यकता होगी, वहां राज्य सरकार नियमानुसार खनन लाइसेंस उपलब्ध कराने में सहयोग करेगी। उन्होंने इस पहल के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के प्रति आभार जताया।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि ‘नदी संजीवनी’ कार्यक्रम के तहत महाराष्ट्र के सफल बुलढाणा मॉडल की तर्ज पर बिहार की नदियों से गाद निकालने का काम किया जाएगा। इससे नदियों का पुनरुद्धार होगा और जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से बिहार सरकार पर कोई वित्तीय भार नहीं पड़ेगा। गाद का उपयोग होने से सड़क निर्माण को गति मिलेगी और बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम करने में भी मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने बिहार की जल जरूरतों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि बिहार बांग्लादेश को पानी दिए जाने का विरोधी नहीं है, लेकिन राज्य की आवश्यकताओं का भी पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए। वर्तमान व्यवस्था में बिहार को जुलाई से अक्टूबर तक ही गंगाजल के उपयोग का अवसर मिलता है। कृषि, उद्योग और पेयजल की जरूरतों को देखते हुए राज्य को पर्याप्त जल उपलब्ध होना जरूरी है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री से गंगा नदी के दोनों किनारों पर फोरलेन सड़क निर्माण कराने का भी आग्रह किया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में 58,340 करोड़ रुपये के निवेश से एनएचएआई की 39 परियोजनाएं कुल 1,561 किलोमीटर लंबाई में निर्माणाधीन हैं। इसके अतिरिक्त 1,85,200 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 1,982 किलोमीटर लंबाई की 11 नई परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। विभिन्न नदियों पर क्षेत्रीय संपर्क मजबूत करने के लिए 29 नए पुलों का निर्माण भी किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि नदियों से गाद निकाले जाने के बाद लगभग एक लाख एकड़ नई भूमि उपलब्ध होने की संभावना है। इस भूमि का उपयोग गंगा किनारे आधुनिक आवासीय कॉलोनियों के विकास में किया जा सकेगा। राज्य में 80 हजार एकड़ भूमि पर 12 नए टाउनशिप विकसित करने की योजना है। इनमें पटना में पाटलिपुत्र, गया में मगध, मुंगेर में अंग, भागलपुर में विक्रमशिला, सहरसा में कोसी, दरभंगा में मिथिला, मुजफ्फरपुर में तिरहुत और सीतामढ़ी में सीतापुरम शामिल हैं। इसके अलावा राज्य में 10 नए एयरपोर्ट और 32 नए मेडिकल कॉलेजों के निर्माण की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि ‘नदी संजीवनी’ कार्यक्रम पर्यावरण संरक्षण, जल संसाधन प्रबंधन, बाढ़ नियंत्रण और आधारभूत संरचना के विकास को एक साथ आगे बढ़ाएगा। इससे बिहार की प्राकृतिक चुनौतियों को विकास के अवसरों में बदलने में मदद मिलेगी।
कार्यक्रम में बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव वी. उमाशंकर, एनएचएआई के अध्यक्ष संतोष कुमार यादव, बिहार पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल, मंत्रालय के संयुक्त सचिव उदित अग्रवाल, एनएचएआई के सदस्य (परियोजनाएं) अनिल चौधरी सहित कई वरीय अधिकारी उपस्थित थे।