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त्योहार से पहले महंगी हुई चीनी-गुड़, प्याज के दाम भी चढ़े; बिगड़ा रसोई का बजट

-त्योहार से पहले महंगी हुई चीनी-गुड़, प्याज के दाम भी चढ़े; बिगड़ा रसोई का बजट

मुजफ्फरपुर। त्योहारों के मौसम से पहले रसोई का स्वाद महंगाई की मार से फीका पड़ता दिख रहा है। मुजफ्फरपुर के बाजारों में पिछले दस दिनों के दौरान चीनी के दाम में प्रति क्विंटल करीब 200 रुपये तक की तेजी दर्ज की गई है। बुधवार को थोक मंडी में चीनी का भाव 64 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया, जबकि खुदरा बाजार में उपभोक्ताओं को 66 रुपये प्रति किलो की दर से चीनी खरीदनी पड़ रही है।
लगातार बढ़ रहे भाव के कारण कई थोक विक्रेता भी असमंजस में हैं। कारोबारी नए माल की खरीद से परहेज कर रहे हैं। बाजार में अचानक आई तेजी के पीछे कारोबारी स्पष्ट कारण नहीं बता पा रहे हैं। कुछ व्यापारियों ने मिलरों की मनमानी और प्रशासनिक निगरानी की कमी को इसकी वजह बताया है।
थोक व्यापारी केदार प्रसाद के अनुसार महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश से आने वाली चीनी के साथ चंपारण की चीनी के भाव में भी अंतर लगभग खत्म हो गया है। प्रमुख मिलरों की कीमतें करीब-करीब एक जैसी होने के कारण स्थानीय कारोबारियों के पास सस्ती चीनी उपलब्ध कराने का विकल्प नहीं बचा है।
चीनी की कीमत बढ़ने के साथ गुड़ के भाव में भी तेज उछाल आया है। करीब दस दिन पहले 50 रुपये प्रति किलो बिकने वाला साधारण गुड़ अब खुदरा बाजार में 80 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। इससे त्योहारों के दौरान मिठाई और अन्य खाद्य सामग्री बनाने की लागत बढ़ने की आशंका है।


वहीं, रसोई के तड़के पर भी महंगाई का असर पड़ा है। प्याज के दाम में एक ही दिन में करीब 10 रुपये प्रति किलो की वृद्धि बताई जा रही है। मंगलवार तक खुदरा बाजार में 40 रुपये प्रति किलो बिक रहा प्याज बुधवार को 50 रुपये प्रति किलो के पार पहुंच गया।
चीनी, गुड़ और प्याज के बढ़ते दामों ने मध्यमवर्गीय परिवारों की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। गृहणियों का कहना है कि रोजमर्रा की जरूरी वस्तुओं के दाम लगातार बढ़ने से महीने का खर्च संभालना मुश्किल हो रहा है।
बाजार के जानकारों ने मांग और आपूर्ति में किसी बड़े बदलाव के बावजूद कीमतों में अचानक वृद्धि पर सवाल उठाए हैं। जमाखोरी और कृत्रिम अभाव पैदा किए जाने की आशंका भी जताई जा रही है। पुराने स्टॉक को रोककर ऊंचे दाम पर बेचने की चर्चाओं के बीच कालाबाजारी की आशंका भी बढ़ गई है। ऐसे में उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए बाजार की निगरानी और जमाखोरी के खिलाफ कार्रवाई की जरूरत महसूस की जा रही है।