-MGCU में ‘साहित्य और पत्रकारिता’ पर विशेष व्याख्यान, बोले रत्नेश्वर- बिना अवलोकन पत्रकारिता नहीं
मोतिहारी, राजन द्विवेदी।
महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के मीडिया अध्ययन विभाग में सोमवार को ‘पत्रकारिता और साहित्य के अंतर्सम्बन्ध’ विषय पर विशेष व्याख्यान हुआ।
मुख्य वक्ता वरिष्ठ साहित्यकार-पत्रकार रत्नेश्वर कुमार सिंह ने कहा कि बिना अवलोकन पत्रकारिता नहीं हो सकती। 2014 के बाद मोबाइल-इंटरनेट ने पत्रकारिता का स्वरूप पूरी तरह बदल दिया है। आज पत्रकारिता केवल पारंपरिक माध्यमों तक सीमित नहीं, तकनीक ने समाचारों के उत्पादन और प्रसार का तरीका बदल दिया है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता में भाषा ऐसी हो जो बात स्पष्ट रूप से लोगों तक पहुंचाए। साहित्य समाज की संवेदनाओं को अभिव्यक्ति देता है, तो पत्रकारिता समकालीन सरोकारों को सामने लाती है।

अध्यक्षीय उद्बोधन में विभागाध्यक्ष प्रो. अरुण कुमार भगत ने कहा कि दोनों ही क्षेत्र समाज से जुड़े हैं, इसलिए निरंतर संवाद जरूरी है। पत्रकार को समाज को समझना और विषयों को संवेदनशीलता से रखना आना चाहिए।
एसोसिएट प्रो. डॉ. अंजनी कुमार झा ने कहा कि पत्रकारिता में सजगता और साहित्य में संवेदनशीलता जरूरी है। संचालन डॉ. परमात्मा कुमार मिश्र और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. उमा यादव ने किया। मौके पर डॉ. मयंक भारद्वाज सहित बड़ी संख्या में शोधार्थी मौजूद रहे।












