-प्रसाद अस्पताल अग्निकांड: ब्रेन सर्जरी मरीज से लेकर डायलिसिस पर भर्ती महिला तक काल के गाल में समाए
-परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप
मुजफ्फरपुर। ब्रह्मपुरा स्थित प्रसाद अस्पताल में गुरुवार तड़के लगी भीषण आग ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। आईसीयू वार्ड में लगी आग और धुएं के कारण ब्रेन सर्जरी के बाद स्वस्थ हो रहे मरीज से लेकर डायलिसिस पर भर्ती मरीज तक इसकी चपेट में आ गए। हादसे में अब तक पांच लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई मरीजों का इलाज विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है।
मृतकों में शिवहर जिले के विशंभरपुर निवासी और एलआईसी एजेंट उदय कुमार, कथैया थाना क्षेत्र के दिस्तौलिया गांव की गीता देवी, औराई के रतनपुरा निवासी शशांक कुमार, मीनापुर के गोरिगमा डीह निवासी कृष्णनंदन सिंह तथा चंचला कुमारी शामिल हैं।
ब्रेन सर्जरी के बाद स्वस्थ हो रहे थे उदय कुमार:
उदय कुमार पिछले चार-पांच दिनों से अस्पताल में भर्ती थे। उनकी ब्रेन सर्जरी हुई थी और वह रिकवरी की प्रक्रिया में थे। घटना के समय उनकी पत्नी नीलू देवी, सास बच्ची देवी, बेटा सत्यम, बेटी आकांक्षा और साला नीतीश अस्पताल में मौजूद थे।
परिजनों ने बताया कि आग लगने की सूचना मिलते ही वे दौड़कर ऊपर पहुंचे, लेकिन तब तक उदय कुमार आग और धुएं की चपेट में आ चुके थे। उनकी मौत की खबर सुनते ही परिवार में कोहराम मच गया।
डायलिसिस पर थीं गीता देवी:
दिस्तौलिया गांव की गीता देवी शुगर और उच्च रक्तचाप से पीड़ित थीं। उनका डायलिसिस चल रहा था और इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनके पुत्र अनीश ठाकुर ने बताया कि हादसे में उनकी मां की जान नहीं बच सकी।
वहीं 78 वर्षीय कृष्णनंदन सिंह 22 मई से अस्पताल में भर्ती थे। फेफड़ों में पानी भरने की शिकायत के कारण उनका इलाज डॉ. संजीव के यूनिट में चल रहा था।
युवक ने ताला तोड़कर बचाई कई जानें:
हादसे के दौरान अस्पताल में मौजूद एक युवक ने दावा किया कि उसने कई मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालने में मदद की। युवक के अनुसार, अस्पताल की लिफ्ट पहले से बंद थी। उसने ताला और कमरे का गेट तोड़कर अंदर फंसे लोगों के लिए हवा आने का रास्ता बनाया और मरीजों को बाहर निकाला।

शवों को लेकर परिजनों का आरोप:
हादसे में जान गंवाने वाले कुछ मरीजों के परिजनों ने आरोप लगाया कि उनके स्वजनों के शवों की जानकारी उन्हें समय पर नहीं दी गई। उनका कहना है कि अस्पताल प्रशासन की ओर से स्पष्ट जानकारी नहीं मिलने के कारण वे अपने परिजनों के शवों की तलाश करते रहे।
हालांकि प्रशासन की ओर से इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है और पूरे मामले की जांच जारी है।
प्रत्यक्षदर्शियों ने उठाए सवाल:
अस्पताल में मौजूद कुछ प्रत्यक्षदर्शियों ने अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि आईसीयू में तकनीकी उपकरणों और एयर कंडीशनिंग सिस्टम के रखरखाव में लापरवाही बरती गई हो सकती है।
एक प्रत्यक्षदर्शी ने दावा किया कि आग लगने के बाद अस्पताल के कई कर्मचारी बाहर निकल गए और मरीजों को खुद ही बचने की कोशिश करनी पड़ी। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
पांचवीं मंजिल के ICU में लगी थी आग:
गुरुवार तड़के ब्रह्मपुरा स्थित प्रसाद अस्पताल की पांचवीं मंजिल पर स्थित आईसीयू वार्ड में अचानक आग लग गई। कुछ ही देर में पूरे भवन में धुआं फैल गया, जिससे मरीजों और उनके परिजनों में अफरा-तफरी मच गई। दमकल विभाग की टीमों ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया और राहत-बचाव अभियान चलाकर कई मरीजों को सुरक्षित बाहर निकाला।
प्रशासन ने घटना की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक तौर पर आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है, लेकिन वास्तविक कारणों और संभावित लापरवाही की जांच की जा रही है। वहीं प्रत्यक्षदर्शियों द्वारा 25 से अधिक मौतों और शव गायब किए जाने जैसे दावों की अभी तक प्रशासनिक स्तर पर पुष्टि नहीं हुई है।











