-बिहार में इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ी रफ्तार, सब्सिडी और जागरूकता से बदल रही लोगों की पसंद
पटना/गया:
बिहार में इलेक्ट्रिक वाहनों (ई-व्हीकल) की मांग लगातार बढ़ रही है। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती लागत, पर्यावरण के प्रति जागरूकता और सरकार की प्रोत्साहन योजनाओं के कारण लोग अब पारंपरिक वाहनों की जगह इलेक्ट्रिक वाहनों को प्राथमिकता देने लगे हैं। राज्य में ई-वाहनों की बिक्री के बढ़ते आंकड़े इस बदलाव की तस्वीर साफ कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, गया जिले में महज 15 दिनों के भीतर 455 इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री दर्ज की गई है। इनमें बड़ी संख्या इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की है। वाहन विक्रेताओं का कहना है कि पहले जहां बिक्री सीमित थी, वहीं अब प्रतिदिन 5 से 6 इलेक्ट्रिक स्कूटी तक की बिक्री हो रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी ई-वाहनों की मांग तेजी से बढ़ी है।
राज्य सरकार द्वारा दी जा रही सब्सिडी योजना भी इस बदलाव की प्रमुख वजह मानी जा रही है। बिहार सरकार की योजना के तहत सामान्य वर्ग के खरीदारों को चारपहिया इलेक्ट्रिक वाहन पर 1.25 लाख रुपये तक तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए 1.50 लाख रुपये तक की प्रोत्साहन राशि उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं दोपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों पर 7,500 से 10,000 रुपये तक की सहायता दी जा रही है।

महिला खरीदारों के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं। इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों पर 12 हजार रुपये तक, कारों पर 1 लाख रुपये तक तथा मालवाहक इलेक्ट्रिक वाहनों पर 50 हजार से 60 हजार रुपये तक की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।
परिवहन विभाग से जुड़ी जानकारी के अनुसार, गया जिले में अब तक 437 से अधिक दोपहिया और 18 चारपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों पर सब्सिडी का लाभ दिया जा चुका है। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) आधारित है, जिससे लाभ की राशि सीधे लाभार्थियों के खाते में भेजी जाती है।
अधिकारियों का मानना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते उपयोग से ईंधन की खपत में कमी आने के साथ-साथ प्रदूषण नियंत्रण और यातायात व्यवस्था पर भी सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल रहा है। बिहार में बढ़ती ई-वाहन संस्कृति को परिवहन क्षेत्र में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।












