-मायावती ने बढ़ा दी नीतीश-तेजस्वी की टेंशन?
-बिहार विधानसभा चुनाव के लिए बीएसपी ने खेला मास्टर स्ट्रोक
दीपक कुमार तिवारी।पटना।
बहुजन समाज पार्टी (BSP) की सुप्रीमो मायावती ने सीएम नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव के लिए टेंशन बढ़ाने वाला ऐलान कर दिया है। बसपा ने ऐलान किया है कि वो 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में सभी 243 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। पार्टी ने इसके लिए ज़मीनी स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है और हर दस बूथ पर एक सेक्टर बनाया जा रहा है। ये जानकारी बीएसपी के केंद्रीय प्रभारी डॉ. लालजी मेधांकर ने दी। डॉ. मेधांकर हाल ही में संपन्न लोकसभा चुनाव की समीक्षा के लिए मुजफ्फरपुर पहुंचे थे।
इस दौरान उन्होंने कहा कि पिछले लोकसभा चुनाव में पार्टी के लगभग 40 प्रतिशत पदाधिकारियों ने अपेक्षा के अनुरूप काम नहीं किया। ऐसे लोगों को भविष्य में पार्टी में कोई पद नहीं दिया जाएगा।
डॉ. मेधांकर ने आगे कहा कि पिछले विधानसभा चुनाव में बीएसपी ने चैनपुर सीट जीती थी और रामगढ़ सीट पर पार्टी को मामूली अंतर से हार का सामना करना पड़ा था। लोकसभा चुनाव की बात करें तो बीएसपी ने 40 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने का फैसला किया था। लेकिन, तकनीकी कारणों से पार्टी 38 सीटों पर ही चुनाव लड़ पाई।पार्टी नेता ने दावा किया कि आगामी विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी अपनी ताकत से सरकार बनाएगी। इस मौके पर बीएसपी के लोकसभा उम्मीदवार रहे डॉ. विजयेश कुमार ने भी अपनी बात रखी।
बैठक में बीएसपी के कई वरिष्ठ नेता उपस्थित थे, जिनमें जिलाध्यक्ष राजेन्द्र कुमार, प्रदेश प्रभारी अधिवक्ता सुरेश राव, प्रदेश महासचिव ललन बैठा, प्रदेश सचिव संतलाल राम और परिमल कुमार शामिल थे।
बसपा की घोषणा से बिहार के राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है। बीएसपी के इस फैसले से जनता दल यूनाइटेड (जदयू) और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) गठबंधन की चिंता ज़रूर बढ़ेगी। दरअसल माना जाता है कि दलित-पिछड़ा समाज का वोट मायावती के साथ रहता है। ये वोट अभीतक नीतीश कुमार और राजद में जाता था। लेकिन बसपा सभी सीटों पर चुनाव लड़ती है तो ये वोट बसपा को मिल सकता है। ऐसे में नुकसान राजद और जदयू को हो सकता है।

बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने पहले ही साफ़ कर दिया है कि उनकी पार्टी किसी भी गठबंधन में शामिल नहीं होगी और अकेले चुनावी मैदान में उतरेगी। ऐसे में बीएसपी का यह कदम सत्ताधारी गठबंधन के लिए कई सीटों पर मुश्किलें पैदा कर सकता है।
देखना होगा कि क्या बीएसपी अपने इस एलान को अमलीजामा पहना पाती है और बिहार की राजनीति में अपनी मज़बूत पहचान बना पाती है।











