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सरस्वती पूजा को लेकर राजापाकर में मूर्ति निर्माण तेज, चार पीढ़ियों से देवी-देवताओं की प्रतिमाएं गढ़ रहा पंडित परिवार

-सरस्वती पूजा को लेकर राजापाकर में मूर्ति निर्माण तेज, चार पीढ़ियों से देवी-देवताओं की प्रतिमाएं गढ़ रहा पंडित परिवार

राजापाकर–संजय श्रीवास्तव।
आगामी 23 जनवरी को होने वाली माता सरस्वती की पूजा को लेकर राजापाकर में मूर्ति कलाकार पूरे उत्साह के साथ प्रतिमा निर्माण में जुटे हुए हैं। प्रखंड मुख्यालय के राजापाकर शनिचर हाट स्थित जनता पुस्तकालय परिसर में मूर्तिकारों द्वारा माता सरस्वती की विभिन्न आकर्षक आकृतियों में प्रतिमाएं तैयार की जा रही हैं। यहां से पूरे प्रखंड क्षेत्र के श्रद्धालु अपनी पसंद की मूर्तियां खरीदकर ले जाते हैं।
मूर्ति कलाकारों के अनुसार श्रद्धालु पहले से ही अपनी पसंद की प्रतिमाओं के लिए अग्रिम राशि जमा कर देते हैं, जिसके बाद निर्धारित समय पर मूर्तियां तैयार कर दी जाती हैं। इसी क्रम में गोरौल प्रखंड के मझिया ग्राम निवासी स्वर्गीय परीक्षण पंडित के पौत्र गोनौर पंडित ने बताया कि उनका परिवार पिछले चार पीढ़ियों से माता दुर्गा, माता लक्ष्मी, माता सरस्वती सहित विभिन्न देवी-देवताओं की मूर्ति निर्माण कला से जुड़ा हुआ है। यज्ञों में स्थापित होने वाली देवी-देवताओं एवं पशु आकृतियों की मूर्तियां भी उनके परिवार द्वारा ही बनाई जाती हैं।


उन्होंने बताया कि राजापाकर प्रखंड क्षेत्र में दुर्गा पूजा, लक्ष्मी पूजा और सरस्वती पूजा के अवसर पर विभिन्न आकृतियों में बनने वाली आकर्षक मूर्तियों का निर्माण उनके परिवार द्वारा किया जाता है। इस कार्य में स्वर्गीय परीक्षण पंडित के वंशज गनौर पंडित, मुकेश पंडित, महेश पंडित, अशोक पंडित सहित अन्य परिजन लगातार लगे रहते हैं।
गोनौर पंडित ने बताया कि पहले मूर्तियां 100 से 500 रुपये तक में बिक जाती थीं, लेकिन अब मूर्ति निर्माण में लगने वाले सामानों की कीमतें बढ़ जाने के कारण 1000 से 5000 रुपये तक की मूर्तियां बनाई जा रही हैं। पहले मजदूर 100 रुपये में काम कर लेते थे, लेकिन अब उन्हें प्रतिदिन 500 से 1000 रुपये मजदूरी देनी पड़ती है। महंगाई बढ़ने का सीधा असर मूर्ति निर्माण की लागत पर पड़ा है।
उन्होंने कहा कि यही मूर्ति निर्माण कला उनके परिवार की आजीविका का एकमात्र साधन है। परिवार का कोई भी सदस्य नौकरी या अन्य पेशे में नहीं है, सभी लोग पीढ़ियों से इस पारंपरिक कला को जीवित रखते हुए इसी कार्य से अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं।