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शाही लीची की विदाई, अब आम का राज; मुजफ्फरपुर की मंडियों में बढ़ी रौनक

-शाही लीची की विदाई, अब आम का राज; मुजफ्फरपुर की मंडियों में बढ़ी रौनक

मुजफ्फरपुर। शाही लीची के सीजन के अंतिम दौर में पहुंचते ही अब मुजफ्फरपुर के फल बाजारों में ‘फलों के राजा’ आम का दबदबा बढ़ गया है। उत्तर बिहार के सबसे बड़े फल केंद्रों में शुमार मुजफ्फरपुर की मंडियों में इन दिनों आम की भारी आवक हो रही है, जिससे बाजारों में फिर से चहल-पहल लौट आई है।

शहर के प्रमुख फल बाजारों और व्यावसायिक केंद्रों जैसे जीरोमाइल, सरैयागंज टावर, कल्याणी चौक, सिकंदरपुर तथा बाजार समिति की मंडियों में आम की विभिन्न किस्मों से दुकानें सजी हुई हैं। लगातार बढ़ रही आवक के कारण आम की कीमतों में भी गिरावट आई है और यह अब आम उपभोक्ताओं की पहुंच में आ गया है।

खुदरा बाजार में बेहतरीन गुणवत्ता वाला आम 100 रुपये में डेढ़ किलो तक बिक रहा है। यानी ग्राहकों को लगभग 65 से 67 रुपये प्रति किलो की दर से आम मिल रहा है, जिससे खरीदारों में खासा उत्साह देखा जा रहा है।

फल आढ़तियों और थोक व्यापारियों के अनुसार, सीजन की शुरुआत में आम के दाम काफी अधिक थे, लेकिन अब पश्चिम बंगाल के मालदा क्षेत्र, दक्षिण भारत और स्थानीय बागानों से लगातार आम की खेप पहुंचने के कारण आपूर्ति बढ़ गई है। इसी वजह से कीमतों में नरमी आई है।

व्यापारियों का कहना है कि अगले एक-दो सप्ताह में स्थानीय मालदह और जर्दालू आम की आवक अपने चरम पर पहुंचने के बाद कीमतों में और कमी आ सकती है।

हालांकि बाजार में दशहरी, जर्दा, बंबई, गुलाब खास और बैंगनपल्ली जैसी कई लोकप्रिय किस्में उपलब्ध हैं, लेकिन मुजफ्फरपुर के लोगों की पहली पसंद अब भी स्थानीय मालदह आम बना हुआ है। खासकर कांटी और मीनापुर क्षेत्र से आने वाले मालदह आम की मांग सबसे अधिक है। वहीं, भागलपुर का प्रसिद्ध और जीआई टैग प्राप्त जर्दालू आम भी अपनी खास खुशबू और स्वाद के कारण ग्राहकों को आकर्षित कर रहा है।

पिछले महीने तक मुजफ्फरपुर और वैशाली की विश्वप्रसिद्ध शाही लीची ने फल बाजार पर अपना वर्चस्व बनाए रखा था। अब लीची का सीजन समाप्ति की ओर है और फल बाजार में पूरी तरह आम का साम्राज्य स्थापित हो चुका है।

शाम होते ही शहर के प्रमुख बाजारों में आम की दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ उमड़ रही है। इससे पिछले कुछ समय से मंदी की मार झेल रहे फल विक्रेताओं के कारोबार को भी नई रफ्तार मिल गई है। आम की बढ़ती मांग और सस्ती कीमतों ने बाजार की रौनक को और बढ़ा दिया है।