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गाँधीजी हमेशा डेमोक्रेसी में विश्वास करते थे और उनके डेमोक्रसी में सबजन शामिल थे : इतिहासकर राजमोहन गाँधी
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एक दिवसीय वार्षिक सम्मेलन (एफ़एसआरसी नेशनल कांफ़्रेंस 2024 का आयोजन किया गया
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वर्ल्ड नेचुरल डेमोक्रेसी (डब्ल्यूएनडी) दरभंगा के अन्तर्गत संचालित स्वतंत्रता अध्ययन अनुसंधान केन्द्र द्वारा एक दिवसीय वार्षिक सम्मेलन (एफ़एसआरसी नेशनल कांफ़्रेंस 2024) का सफल आभासीय आयोजन किया गया। कार्यक्रम में स्वागत भाषण डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम विमेंस इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी एलएनएमयू के पूर्व निदेशक प्रो. एम. नेहाल द्वारा एवं विषय प्रवेश महात्मा गाँधी अन्तरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय के सामाजिक कार्य पीठ के पूर्व निदेशक प्रो. मनोज कुमार द्वारा दिया गया। डब्ल्यूएनडी के जन सम्पर्क पदाधिकारी मनीष कुमार त्रिगुणायत ने प्रेस नोट जारी करते हुये बताया कि इस सम्मेलन में राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर के ख्यातिप्राप्त देश भर के कई विद्वान वक्ता के रूप में सम्मिलित हुये और सम्मेलन के विषय ‘भविष्य का भारत : गाँधी और गणतंत्र’ पर वक्ताओं ने अपने विचार रखे। राज्य सभा के पूर्व सदस्य, इतिहासकार और महात्मा गाँधी के पोते राजमोहन गाँधी नें अपने वक्तव्य में कहा कि आज भारत सहित विश्व भर में डेमोक्रेसी न होकर सुपरमेसी का राज बनता जा रहा है। गाँधीजी हमेशा डेमोक्रेसी में विश्वास करते थे और उनके डेमोक्रसी में सबजन शामिल थे। आईआईटी दिल्ली के पूर्व प्लाज़मा वैज्ञानिक विपिन कुमार त्रिपाठी ने कहा कि गाँधीजी ने आज़ादी का जो भावार्थ रचा था, वह आज धुँधला पड़ गया है।

वहीं स्वराज इण्डिया के राष्ट्रीय संयोजक एवं समाजशास्त्री प्रो. आनन्द कुमार ने कहा कि गाँधीजी ने ट्रस्टीशिप की बात की लेकिन देश पूंजीवाद की तरफ़ बढ़ रहा है। गाँधीजी ने सादगी की बात की लेकिन आज भारत सहित विश्व भौतिक संग्रह की तरफ़ बढ़ रहा है। गाँधीजी के रामराज्य पर बोलते हुए पत्रकार एवं राजनीतिक चिन्तक प्रो. अभय कुमार दुबे ने कहा कि आज का रामराज्य वह नहीं है जो गाँधीजी ने रामराज्य की परिकल्पना की थी। दार्शनिक अम्बिका दत्त शर्मा ने अपने वक्तव्य में कहा कि आज देश में जिस राम को स्थापित किया जा रहा है वे गाँधी के राम नहीं हैं। गाँधी के राम को पुनः समझना होगा। तभी भारत का गणतंत्र मज़बूत, सुरक्षित एवं समावेशी होगा। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मेघा कुमारी और सुश्री आयुषी वर्मा द्वारा किया गया। इस सम्मेलन के संयोजक प्रो. मनोज कुमार एवं एमएलएसएम कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य प्रो. विद्यानाथ झा थे। कार्यक्रम के अन्त में सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापन स्वतंत्रता अध्ययन अनुसंधान केन्द्र के संस्थापक लेखक व दार्शनिक डॉ. जावैद अब्दुल्लाह द्वारा दिया गया। उक्त कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्वान, प्राध्यापक, शोधार्थीगण व श्रोतागण जुड़े।











