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राजापाकर में किसान निबंधन शिविर में अव्यवस्थाएं, सर्वर फेल और भूमि दस्तावेज़ नियम बना बाधा

-राजापाकर में किसान निबंधन शिविर में अव्यवस्थाएं, सर्वर फेल और भूमि दस्तावेज़ नियम बना बाधा

राजापाकर/संजय श्रीवास्तव।

राजापाकर प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न पंचायतों में किसान निबंधन को लेकर शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। शिविरों में निबंधन के साथ-साथ किसानों का केवाईसी भी किया जा रहा है, लेकिन तकनीकी और प्रशासनिक अव्यवस्थाओं के कारण किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सर्वर काम नहीं करने के कारण कृषि सलाहकारों एवं राजस्व कर्मियों को कार्य करने में दिक्कत हो रही है। इसके चलते बड़ी संख्या में किसान शिविरों से बिना निबंधन कराए ही लौटने को मजबूर हैं। वहीं, किसान निबंधन में जमीन के दस्तावेज अपने नाम से लगान रसीद नहीं होने के कारण भी अधिकांश किसानों का निबंधन नहीं हो पा रहा है।
ज्ञात हो कि कृषि एवं राजस्व विभाग द्वारा किसान निबंधन प्रक्रिया में किसानों के नाम से भूमि की रसीद अनिवार्य की गई है, जबकि क्षेत्र के लगभग 90 प्रतिशत किसानों की जमीन अब भी उनके पूर्वजों के नाम पर दर्ज है। ऐसे में वर्तमान नियमों के तहत किसान निबंधन कराना उनके लिए लगभग असंभव हो गया है।
किसान नेता सुमन कुमार यादव, बिंदेश्वर राय, जोगेंद्र राय, अधिवक्ता सुरेश प्रसाद सिंह, मोहित पासवान समेत अन्य लोगों ने राज्य एवं केंद्र सरकार से किसान निबंधन प्रक्रिया के नियमों में बदलाव की मांग की है। नेताओं का कहना है कि यदि नियमों में संशोधन नहीं किया गया तो बड़ी संख्या में किसान निबंधन से वंचित रह जाएंगे।


वहीं, राजापाकर दक्षिणी पंचायत के कई किसानों ने कृषि सलाहकार द्वारा बकेट ऑनलाइन नहीं किए जाने पर आक्रोश जताया है। जानकारी के अनुसार प्रत्येक पंचायत के कृषि सलाहकारों को राजस्व विभाग द्वारा संबंधित पंचायत के किसानों की भूमि का ब्योरा बकेट में उपलब्ध कराया जाता है, लेकिन राजापाकर दक्षिणी पंचायत के लिए अब तक बकेट नहीं भेजा गया है। इससे किसान शिविर में पहुंचकर भी निबंधन नहीं करा पा रहे हैं।
इस संबंध में अंचलाधिकारी गौरव कुमार ने बताया कि प्रखंड के सभी हल्कों में कृषि सलाहकारों को भूमि संबंधी बकेट उपलब्ध करा दिया गया है। हालांकि, राजापाकर दक्षिणी पंचायत का बकेट अभी उपलब्ध नहीं हो पाया है। शीघ्र ही बकेट उपलब्ध कराते हुए कृषि सलाहकार को ऑनलाइन कर दिया जाएगा, ताकि किसानों का निबंधन सुचारू रूप से हो सके।