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मुजफ्फरपुर : जांच न कार्यवाई,कागजी खानापूर्ति एवं मनमानी का शिकार है बन्दरा प्रखण्ड की प्रायः आंगनबाड़ी केंद्र

-जांच न कार्यवाई,कागजी खानापूर्ति एवं मनमानी का शिकार है बन्दरा की प्रायः आंगनबाड़ी केंद्र

-कहीं पंचायतीराज तो कहीं दलीय प्रतिनिधियों के ख़ौफ़ पर आधिकारिक जांचों की हो रही खानापूर्ति
-प्रखण्ड के उत्तर से दक्षिण के गांवों तक बदतर हालात

मुजफ्फरपुर/बन्दरा।दीपक कुमार तिवारी।

जिले की बन्दरा प्रखंड क्षेत्र में बाल विकास परियोजना द्वारा संचालित प्रायः आंगनबाड़ी केंद्रों की बदतर हालात है। बच्चों के लिए शैक्षणिक माहौल,योजनाओं के वितरण सहित विभिन्न गतिविधियों में खानापूर्ति की शिकायतें मिल रही है, बावजूद ऐसे मामलों में धरातल पर जांच एवं कार्रवाई को लेकर ना स्थानीय जनप्रतिनिधि गंभीर हैं, न हीं संबंधित अधिकारी। केंद्र संचालन कार्यों,टेक होम राशन सहित विभिन्न हितकारी योजनाओं के वितरण,जांच एवं कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है। गांव के लोगों की मानें तो खुल्लम-खुल्ला आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है। सबसे बढ़कर हालत प्रखण्ड के तेपरी, सुंदरपुर रतवारा,पटसारा,मुन्नी-बैंगरी,हत्था,नूनफ़ारा आदि पंचायत क्षेत्र के आंगनबाड़ी केंद्रों की है।

कहीं आंगनबाड़ी सेविका या सहायिकाओं के पति या पारिवारिक सदस्य पंचायती राज के जनप्रतिनिधि हैं तो कहीं राजनीतिक दलों में प्रखंड एवं पंचायत स्तरीय प्रतिनिधि है। लिहाजा उनके ख़ौफ़ एवं दबाव की वजहों से अधिकारी भी जांच करने से कतराते हैं। जांच के नाम पर महज औपचारिकता की जा रही है और बदले में गरीब परिवार के बच्चों,पोषण क्षेत्र की धात्री महिलाओं आदि को मिलने वाली सुविधाओं की खानापूर्ति कर हकमारी की जा रही है। क्षेत्र में कई जगहों पर आंगनबाड़ी सेविकाओं एवं उनके पतियों के मनमानी के वजहों से केंद्र क्षेत्र की बच्चों को मिलने वाली पीएमवाई योजना, मुख्यमंत्री बालिका योजना आदि के लाभ भी नहीं मिल पा रहे हैं।जन्म प्रमाण पत्र के लिए पोषण क्षेत्र के लोग परेशान रहते हैं। सभी के नाम पर खानापूर्ति या टालमटोल की शिकायतें है। वही ग्रामीणों की शिकायत है कि प्रखंड मुख्यालय में बाल विकास परियोजना कार्यालय में शिकायत करने जाने पर सीडीपीओ भी नहीं मिल पाती हैं।कर्मी बताते हैं कि कई प्रखंडों के प्रभार में रहने की वजहों से वे नहीं रह पाती हैं। वहीं स्थानीय पर्यवेक्षक का दावा है की सभी जगह जांच-कार्रवाई नियमित किए जा रहे हैं।लेकिन कागजी दावे एवं धरातल में काफी फर्क नजर आता है।जिससे क्षेत्र के लोगों में आक्रोश है।