-मन को स्वच्छ रखने का सर्वोत्तम उपाय सेवा करना है- उमाशंकर पोद्दार
भागलपुर से शशि भूषण मिश्र की रिपोर्ट।
भारती शिक्षा समिति एवं शिशु शिक्षा प्रबंध समिति के तत्वावधान में सैनिक स्कूल गणपत राय सलारपुरिया सरस्वती विद्या मंदिर नरगाकोठी में चल रहे नवीन आचार्य प्रशिक्षण वर्ग के ग्यारहवें दिन का प्रारंभ रोहतास विभाग के निरीक्षक उमाशंकर पोद्दार, गया विभाग के निरीक्षक ब्रह्मदेव प्रसाद ,नालंदा के प्रवासी कार्यकर्ता राजेश कुमार ,परमेश्वर कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
उमाशंकर पोद्दार ने कार्यालय लेखा प्रशिक्षणार्थी को मार्गदर्शन देते हुए कहा कि मन को स्वच्छ रखने का सर्वोत्तम उपाय सेवा करना है। प्रकृति का हर एक कार्य परोपकार के लिए होता है। कार्यालय का मुख्य कार्य सूचनाओं को प्राप्त करना ,रिकॉर्ड करना ,उनका विश्लेषण करना और उन्हें आवश्यकता अनुसार प्रदान करना है। कार्यालय में विभिन्न कार्यों के लिए राशि के आहरण करने एवं उसका वितरण करने संबंधी कार्यों को नियमानुसार व सही तरीके से संपादन करने के उद्देश्य से विद्यालय में कार्यालय प्रमुख होते हैं। उन्होंने कार्यालय लेखा प्रशिक्षणार्थी को आय-व्यय संबंधी नियम को विस्तार पूर्वक समक्षाया।
राजेश कुमार ने कहा कि प्रायोगिक ज्ञान एक शिक्षण प्रक्रिया है जिसमें अनुभव के माध्यम से छात्रों को शिक्षित किया जाता है। छात्रों को व्यवहारिक गतिविधियों में शामिल करते हैं और फिर उन्होंने जो सीखा है उस पर चिंतन करने में उनका मार्गदर्शन करते हैं। यह प्रक्रिया छात्रों की ज्ञान को बढ़ाने उनके कौशल विकसित करने और उनके मूल्यों को स्पष्ट करने में मदद करता है। उन्होंने कक्षा लेते हुए कई प्रयोग के माध्यम से प्रशिक्षणार्थी को खेल-खेल में पढ़ने की विधि को बताया।

गंगा चौधरी द्वारा सेवा कार्य के बारे में विस्तार पूर्वक बताया गया जिसमें एकल विद्यालय एवं संस्कार केंद्र में चलने वाले शिक्षा को बताया।
वीरेंद्र कुमार द्वारा शिशु वाटिका कक्षा संपादन को विस्तार पूर्वक बताया गया।
इस अवसर पर राकेश नारायण अम्बष्ट,सतीश कुमार सिंह,संजीव पाठक ,जयंत मिश्र, शशि भूषण मिश्र, आलोक कुमार ,चंद्रशेखर कुमार, सुजीत कुमार गुप्ता ,ममता जायसवाल,सुप्रिया कुमारी,रिचा कुमारी एवं प्रशिक्षणार्थी उपस्थित थे ।












