-मनियारी और बन्दरा में धूमधाम से मना विजयादशमी पर्व, 100 फीट के रावण का हुआ दहन
-छपकी हाट में राम-रावण युद्ध की जीवंत लीला ने मोहा मन
-सोनबरसा शाह में उमड़ा लाखों दर्शकों का जनसैलाब
मुजफ्फरपुर। अहंकार, असत्य और अधर्म पर सत्य एवं धर्म की विजय का प्रतीक विजयादशमी का पर्व मंगलवार को मुजफ्फरपुर जिले के बन्दरा प्रखंड के रतवारा, मनियारी, सोनबरसा शाह और आसपास के क्षेत्रों में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विभिन्न पूजा स्थलों और ऐतिहासिक मैदानों में भव्य मेले का आयोजन किया गया। रावण दहन देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु और दर्शक पहुंचे। चारों ओर धार्मिक उत्साह और जय श्रीराम के जयकारे गूंजते रहे।
मनियारी स्थित छपकी हाट में विजयादशमी के अवसर पर भव्य मेले के साथ रामलीला का विशेष मंचन किया गया। इसमें भगवान श्रीराम की सेना और रावण, मेघनाद व कुंभकर्ण की सेना के बीच घनघोर युद्ध की जीवंत प्रस्तुति दी गई। कलाकारों के शानदार अभिनय ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। युद्ध लीला के अंतिम चरण में भगवान श्रीराम ने जैसे ही धनुष पर अग्निबाण चढ़ाया, पूरा मैदान जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। इसके बाद बाण लगते ही रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के विशालकाय पुतले धू-धू कर जल उठे। इस दृश्य को देखने के लिए मैदान में बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

वहीं, सोनबरसा शाह में सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति के तत्वावधान में भव्य मेले का आयोजन किया गया। मेले का मुख्य आकर्षण 100 फीट ऊंचा रावण का विशालकाय पुतला रहा। रावण दहन का नजारा देखने के लिए स्थानीय क्षेत्र के अलावा सकरा, कुढ़नी और पड़ोसी जिले वैशाली से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। मैदान और आसपास के इलाकों में दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। भीड़ को नियंत्रित करने और आयोजन को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए पुलिस-प्रशासन तथा आयोजन समिति के सदस्य मुस्तैद रहे।
इधर, सकरा प्रखंड के हुसेपुर से भगवान श्रीराम और रावण की सेना की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। दोनों सेनाएं युद्ध लीला का प्रदर्शन करते हुए आयोजन स्थल तक पहुंचीं। रास्ते में कलाकारों के बीच हुए प्रतीकात्मक युद्ध ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया और पूरे क्षेत्र में धार्मिक उत्साह का माहौल बना दिया।
अंत में भगवान श्रीराम की विजय के साथ अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की जीत का संदेश दिया गया। श्रीराम के अग्निबाण चलाते ही 100 फीट ऊंचे रावण का पुतला जलकर राख हो गया। आयोजकों ने कहा कि विजयादशमी के ऐसे आयोजन समाज में आपसी भाईचारा, सद्भाव और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। पूरे कार्यक्रम के दौरान स्थानीय पुलिस-प्रशासन और पूजा समिति के सदस्य व्यवस्था बनाए रखने में जुटे रहे।












