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बिहार कांग्रेस में बगावत की आंधी: टिकट बिक्री और संगठन कमजोर करने के आरोप, नाराज़ नेताओं का दिल्ली मार्च—सात नेता निष्कासित

-बिहार कांग्रेस में बगावत की आंधी: टिकट बिक्री और संगठन कमजोर करने के आरोप, नाराज़ नेताओं का दिल्ली मार्च—सात नेता निष्कासित

पटना/दिल्ली।संवाददाता।

बिहार कांग्रेस इन दिनों हल्की फुल्की नाराज़गी नहीं, बल्कि तेज राजनीतिक बगावत का सामना कर रही है। प्रदेश संगठन में मची उठापटक अब पटना की सीमाओं से बाहर निकलकर सीधे दिल्ली के सियासी गलियारों में भूकंप सा असर छोड़ रही है। असंतुष्ट नेताओं का एक बड़ा दल सोमवार को ही दिल्ली रवाना हो चुका है, जिनमें एआईसीसी सदस्य आनंद माधव और पूर्व विधायक छत्रपति यादव भी शामिल हैं। यह नेता आज राहुल गांधी से मुलाकात की तैयारी में हैं और उन्होंने औपचारिक समय भी माँगा है।

नाराज़ नेताओं का आरोप बेहद गंभीर है। उनका कहना है कि प्रदेश कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अल्लावरू और प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने पार्टी संगठन को कमजोर किया है और टिकट बेचे जाने समेत कई अनियमितताओं में शामिल रहे हैं। असंतुष्ट गुट की मांग है कि दोनों को तुरंत हटाया जाए, ताकि पार्टी की साख और संगठनात्मक संरचना बचाई जा सके।

उधर, प्रदेश कांग्रेस ने सोमवार को कड़ा एक्शन लेते हुए सात नेताओं को पार्टी-विरोधी गतिविधियों के आरोप में छह साल के लिए निष्कासित कर दिया। निष्कासित नेताओं में शामिल हैं—

आदित्य पासवान (पूर्व उपाध्यक्ष, कांग्रेस सेवा दल)

शकीलुर रहमान (पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष)

राजकुमार शर्मा (पूर्व अध्यक्ष, किसान कांग्रेस)

राजकुमार राजन (पूर्व अध्यक्ष, युवा कांग्रेस)

कुंदन गुप्ता (पूर्व अध्यक्ष, अति पिछड़ा प्रकोष्ठ)

कंचना कुमारी (पूर्व जिला अध्यक्ष, बांका)

रवि गोल्डन (नालंदा)

असंतुष्ट गुट इस कार्रवाई को “दरार भरने का प्रयास नहीं, बल्कि आग में घी” बता रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी के भीतरखाने का संघर्ष अब खुली जंग का रूप ले सकता है।

इस बीच, जब संगठन खुद गंभीर अंतर्कलह से गुजर रहा है, बिहार कांग्रेस संविधान दिवस पर बड़ा कार्यक्रम आयोजित करने जा रही है। सभी जिला मुख्यालयों में “संविधान संरक्षण और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा” विषय पर विचार गोष्ठी होगी, जिसमें वरिष्ठ नेता, बुद्धिजीवी, सामाजिक कार्यकर्ता, वकील और युवाओं को जोड़ने का प्रयास होगा। प्रदेश कार्यालय ने सभी जिलों को सख्त निर्देश दिया है कि आयोजन अनुशासित, गंभीर और उच्च भागीदारी वाला हो तथा इसकी एक्शन टेकन रिपोर्ट तत्काल भेजी जाए।

एक तरफ दिल्ली में शिकायतों का दौर, दूसरी तरफ बिहार में संविधान बचाने का आह्वान—और इनके बीच झूलती बिहार कांग्रेस की गिरती साख, बढ़ती कलह और अनिश्चित भविष्य की कहानी।
राजनीतिक पंडितों की नजर अब इस बात पर टिक गई है कि राहुल गांधी की बैठक क्या सुलह का दरवाजा खोलेगी, या फिर विभाजन की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है।