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15 अगस्त के ध्वजारोहण में स्थानीय स्वतंत्रता सेनानियों के नाम का भी हो जयघोष

-15 अगस्त के ध्वजारोहण में स्थानीय स्वतंत्रता सेनानियों के नाम का भी हो जयघोष

मुजफ्फरपुर, 10 अगस्त 2026। स्वतंत्रता दिवस को केवल राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाने के बजाय इसे स्थानीय स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृति से जोड़ने की पहल की गई है। इस संबंध में सपोर्ट फाउंडेशन ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी तथा कला, संस्कृति एवं युवा विभाग के मंत्री प्रमोद चन्द्रवंशी को ई-मेल के माध्यम से पत्र भेजकर महत्वपूर्ण सुझाव दिया है।
सपोर्ट फाउंडेशन के अध्यक्ष रंगीश ठाकुर ने सरकार से आग्रह किया है कि 15 अगस्त को बिहार के प्रत्येक विद्यालय में ध्वजारोहण के बाद राष्ट्रीय और बिहार के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानियों के साथ-साथ संबंधित गांव अथवा पंचायत के स्थानीय स्वतंत्रता सेनानी के नाम का भी सामूहिक जयघोष किया जाए। उन्होंने कहा कि ऐसे स्थानीय स्वतंत्रता सेनानियों ने स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, लेकिन समय के साथ उनकी स्मृतियां जनमानस से दूर होती जा रही हैं।
रंगीश ठाकुर ने कहा कि बिहार का स्वतंत्रता आंदोलन में गौरवपूर्ण योगदान रहा है। चंपारण सत्याग्रह से लेकर भारत छोड़ो आंदोलन तक बिहार के बड़ी संख्या में लोगों ने स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया और कई लोगों ने राष्ट्र के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया। इनमें अनेक ऐसे स्वतंत्रता सेनानी भी शामिल हैं, जिनके योगदान को स्थानीय स्तर पर पर्याप्त पहचान नहीं मिल सकी है।


उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक विद्यालय में 15 अगस्त के अवसर पर “महात्मा गांधी जी की जय”, “बाबू वीर कुंवर सिंह जी की जय”, “बिहार के स्वतंत्रता सेनानियों की जय” के साथ उस गांव अथवा पंचायत के स्वतंत्रता सेनानी के नाम का भी जयघोष किया जाए, तो इससे बच्चों को अपने स्थानीय इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ने का प्रभावी माध्यम तैयार हो सकता है।
फाउंडेशन का कहना है कि विद्यालयों में इस तरह का जयघोष महज औपचारिकता नहीं होगा, बल्कि नई पीढ़ी में देशभक्ति, स्थानीय गौरव और स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति सम्मान की भावना विकसित करने का संस्कार बनेगा। इससे बच्चों को अपने क्षेत्र के उन महान लोगों के बारे में जानने का अवसर मिलेगा, जिन्होंने देश की आजादी के लिए संघर्ष किया था।
सपोर्ट फाउंडेशन ने सरकार से आग्रह किया है कि शिक्षा विभाग तथा कला, संस्कृति एवं युवा विभाग के समन्वय से बिहार के विद्यालयों के लिए आवश्यक मार्गदर्शिका या निर्देश जारी किए जाएं। इसके तहत प्रत्येक विद्यालय अपने क्षेत्र के स्वतंत्रता सेनानियों की पहचान कर स्वतंत्रता दिवस समारोह में उनका सम्मानपूर्वक स्मरण कर सके।
रंगीश ठाकुर ने कहा कि “हर घर तिरंगा” अभियान के साथ यदि “हर पीढ़ी स्वतंत्रता सेनानियों को याद करे” का संकल्प भी जुड़ जाए, तो यह बिहार के गौरवशाली स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की दिशा में सार्थक कदम होगा। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्वतंत्रता सेनानियों को विद्यालयों के स्वतंत्रता दिवस समारोह से जोड़ने से नई पीढ़ी अपने क्षेत्र के इतिहास और देश की आजादी के संघर्ष से और अधिक करीब से जुड़ सकेगी।