-बाढ़ और सुखाड़ से निपटने की तैयारियों की मुख्यमंत्री ने की समीक्षा
-जून के अंत तक सभी जिलों में पूरी हों आवश्यक व्यवस्थाएँ: नीतीश कुमार
पटना। दीपक कुमार तिवारी।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को मुख्य सचिवालय स्थित सभागार में संभावित बाढ़ एवं सुखाड़ के पूर्व तैयारियों की समीक्षा की। इस बैठक में राज्य के सभी जिलों के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए।
बैठक में आपदा प्रबंधन विभाग के अपर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने आगामी मॉनसून सीजन के लिए बिहार मौसम सेवा केंद्र द्वारा जारी वर्षा पूर्वानुमान की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जून में सामान्य से कम वर्षा की संभावना है, जबकि जुलाई से सितंबर तक वर्षा सामान्य रहने की संभावना जताई गई है।
पूर्व तैयारियों का खाका प्रस्तुत:
श्री अमृत ने संभावित आपदा के मद्देनजर राज्य स्तर पर की जा रही तैयारियों की विस्तृत जानकारी दी। इसमें नाव संचालन, पॉलिथिन शीट्स, राहत सामग्री, दवाइयां, पशुचारा, बाढ़ आश्रय स्थल, सामुदायिक रसोई, ड्राई राशन पैकेट, जिला आपातकालीन केंद्र जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री राहत कोष से राहत कार्य संचालित किए जाएंगे और आनुग्रहिक अनुदान की राशि 7000 रुपये प्रति परिवार की दर से दी जाएगी। मृतकों के परिजनों को 4 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने दिए स्पष्ट निर्देश:
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा, “राज्य के खजाने पर पहला अधिकार आपदा पीड़ितों का है।” उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी और विभाग सतर्क रहें और इस माह के अंत तक तैयारियाँ पूरी कर लें।
मुख्यमंत्री ने तटबंधों की सुरक्षा, क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत, पेयजल, चिकित्सा व्यवस्था और किसानों के लिए मुआवजा योजना पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने निर्देश दिया कि जून के पहले सप्ताह तक जिलों में बैठकें कर स्थिति का आकलन कर आवश्यक कार्यवाही शुरू की जाए।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि 2005 के बाद से राज्य सरकार ने आपदा प्रबंधन को प्राथमिकता दी है। कोसी त्रासदी (2008) और 2007 की बड़ी बाढ़ का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि सरकार ने हर बार तत्परता से राहत और पुनर्वास कार्य किए हैं।
उच्चस्तरीय उपस्थिति:
बैठक में दोनों उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी एवं विजय कुमार सिन्हा, जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी, योजना एवं विकास मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय, पथ निर्माण मंत्री नितिन नवीन, पशुपालन मंत्री रेणु देवी, सहित कई अन्य वरिष्ठ मंत्री, विभागीय सचिव, आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य एवं NDRF तथा SDRF के अधिकारी मौजूद थे। वहीं, जिलों के प्रभारी मंत्री एवं सचिव को ज़मीनी स्थिति का मूल्यांकन कर रिपोर्ट देने को कहा गया।











