-फार्मर्स निबंधन महाअभियान: रिविजनल सर्वे जिलों की बढ़त, कैडस्ट्रल सर्वे जिलों में पुरानी चुनौतियाँ
दीपक कुमार तिवारी।
बिहार में एग्रीस्टैक के तहत संचालित फार्मर्स रजिस्ट्रेशन महाअभियान की प्रगति की समीक्षा से एक अहम तथ्य सामने आया है। राज्य के वे जिले, जहाँ रिविजनल सर्वे (RS) लागू है, फार्मर्स निबंधन के मामले में कैडस्ट्रल सर्वे (CS) वाले जिलों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। यह अंतर केवल आँकड़ों तक सीमित नहीं, बल्कि भूमि अभिलेखों की संरचना और गुणवत्ता से गहराई से जुड़ा हुआ है।
9 जनवरी की रात्रि 8 बजे तक उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार, कन्वर्जन रेट, निबंधन की गति और राज्य स्तरीय रैंकिंग—तीनों ही मापदंडों पर आरएस जिलों की स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत पाई गई। इसका प्रमुख कारण इन जिलों में भूमि अभिलेखों का अपेक्षाकृत अद्यतन होना, जमाबंदी की स्पष्टता और उत्तराधिकार विवादों की कम संख्या है।
आरएस जिलों की उपलब्धि: साफ अभिलेख, तेज निबंधन:
फार्मर्स रजिस्ट्रेशन में 100 प्रतिशत या उससे अधिक उपलब्धि हासिल करने वाले जिलों में मुजफ्फरपुर, वैशाली, अररिया, भागलपुर और कटिहार जैसे जिले प्रमुख हैं। ये सभी जिले रिविजनल सर्वे से आच्छादित हैं। भूमि अभिलेखों की स्पष्टता के कारण इन जिलों में किसानों का ई-केवाईसी, अभिलेख सत्यापन और रजिस्ट्रेशन अपेक्षाकृत कम समय में पूरा हो पा रहा है। परिणामस्वरूप, न केवल संख्या में बढ़ोतरी हुई है, बल्कि राज्य स्तरीय रैंकिंग में भी इन जिलों ने उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है।
सीएस जिलों में संरचनात्मक अड़चनें:
इसके विपरीत, पूर्वी चंपारण, पटना, जहानाबाद, लखीसराय और मुंगेर जैसे कैडस्ट्रल सर्वे प्रधान जिलों में फार्मर्स रजिस्ट्रेशन की गति अपेक्षाकृत धीमी है। इन जिलों में दशकों पुराने भूमि अभिलेख, संयुक्त जोत, उत्तराधिकार से जुड़े लंबित मामले और भू-खंडों का अत्यधिक विखंडन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को जटिल बना रहे हैं।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह स्थिति किसी प्रशासनिक शिथिलता का परिणाम नहीं है, बल्कि ऐतिहासिक और संरचनात्मक अभिलेखीय चुनौतियों का स्वाभाविक प्रभाव है।
रैंकिंग के आंकड़े भी देते हैं संकेत:
8 और 9 जनवरी के बीच जिलों की रैंकिंग में हुए बदलाव इस प्रवृत्ति की पुष्टि करते हैं। कैमूर, भोजपुर, भागलपुर और वैशाली जैसे आरएस जिलों की रैंकिंग में सुधार देखा गया, जबकि नालंदा, पटना, जहानाबाद और जमुई जैसे सीएस जिलों में रैंकिंग ठहराव या गिरावट की स्थिति में रही।

नीति और प्रशासनिक रणनीति:
एग्रीस्टैक के अंतर्गत किसानों के पंजीकरण के लिए साफ भू-खंड, स्पष्ट स्वामित्व और न्यूनतम मैनुअल हस्तक्षेप अनिवार्य है। ये शर्तें आरएस जिलों में अपेक्षाकृत सहज रूप से पूरी हो रही हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग ने निर्णय लिया है कि सीएस जिलों में फार्मर्स रजिस्ट्रेशन को गति देने के लिए अतिरिक्त मानव संसाधन तैनात किए जाएंगे।
परिमार्जन, दाखिल–खारिज की प्रक्रिया को सरल बनाने और मौजूदा ई-केवाईसी के प्रभावी कन्वर्जन पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि आरएस जिलों के लिए निर्धारित आक्रामक लक्ष्य यथार्थपरक हैं और ये राज्य स्तर पर समग्र उपलब्धि सुनिश्चित करने में सहायक सिद्ध होंगे।
आंकड़ों में तस्वीर:
कुल पंजीकरण संख्या के आधार पर मुजफ्फरपुर 75,568 पंजीकरण के साथ राज्य में पहले स्थान पर है। इसके बाद वैशाली (60,697), कटिहार (58,611), पूर्णिया (56,030) और भागलपुर (55,314) जैसे आरएस जिले अग्रणी हैं।
अररिया, गया और सीतामढ़ी ने भी 45 हजार से अधिक पंजीकरण कर उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है।
आरएस आंशिक श्रेणी में समस्तीपुर (35,767), सुपौल (33,185) और बांका (30,174) ने अच्छी प्रगति दर्ज की।
वहीं सीएस जिलों में पूर्वी चंपारण (51,145), दरभंगा (44,834), बेगूसराय (41,932) और नालंदा (38,146) तक पंजीकरण की संख्या पहुँची है। अरवल, जहानाबाद और लखीसराय जैसे कुछ सीएस जिलों में संख्या अपेक्षाकृत कम बनी हुई है।
मंत्री का बयान: गुणवत्ता से तय होती है गति
उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि एग्रीस्टैक के अंतर्गत फार्मर्स रजिस्ट्रेशन की प्रगति यह स्पष्ट दर्शाती है कि भूमि अभिलेखों की गुणवत्ता का सीधा प्रभाव निबंधन की गति और कन्वर्जन पर पड़ता है।
उन्होंने कहा कि आरएस जिलों में अपेक्षाकृत साफ और अद्यतन अभिलेख होने के कारण फार्मर्स रजिस्ट्रेशन तेजी से हो रहा है, जबकि सीएस जिलों में उत्तराधिकार, संयुक्त जोत और पुराने अभिलेखों से जुड़ी चुनौतियाँ हैं।
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार विशेष रणनीति के तहत अतिरिक्त मानव संसाधन, आसान परिमार्जन और दाखिल–खारिज व्यवस्था तथा प्रभावी ई-केवाईसी कन्वर्जन के माध्यम से इन चुनौतियों से निपट रही है। यह किसी प्रकार की प्रशासनिक कमजोरी नहीं, बल्कि दशकों पुरानी अभिलेखीय विरासत से जुड़ी स्वाभाविक चुनौती है।
स्पष्ट है कि बिहार में एग्रीस्टैक के तहत फार्मर्स रजिस्ट्रेशन की प्रगति सीधे तौर पर रिविजनल सर्वे और कैडस्ट्रल सर्वे की संरचना से जुड़ी हुई है। जहाँ आरएस जिले डिजिटल क्रियान्वयन के लिए अधिक अनुकूल सिद्ध हो रहे हैं, वहीं सीएस जिलों में ऐतिहासिक अभिलेखीय समस्याओं के कारण प्रक्रिया अपेक्षाकृत धीमी है।
राज्य सरकार इसे चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए सुधारात्मक कदम उठा रही है, ताकि हर किसान को यूनिक किसान आईडी से जोड़कर योजनाओं का पारदर्शी और समयबद्ध लाभ सुनिश्चित किया जा सके।











