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नीतीश कुमार का सर्वधर्म दौरा — मंदिर, गुरुद्वारा और मजार में की प्रार्थना, चुनाव बाद दिया “सद्भाव का संदेश”

-नीतीश कुमार का सर्वधर्म दौरा — मंदिर, गुरुद्वारा और मजार में की प्रार्थना, चुनाव बाद दिया “सद्भाव का संदेश”

पटना। दीपक कुमार तिवारी।

बिहार विधानसभा चुनाव के दोनों चरणों का मतदान संपन्न होने के एक दिन बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बुधवार को राजधानी पटना के धार्मिक स्थलों के दौरे पर निकले। उन्होंने महावीर मंदिर में पूजा-अर्चना की, पटना साहिब गुरुद्वारे में मत्था टेका और फिर हाईकोर्ट के पास स्थित मजार पर जाकर अमन और चैन के लिए दुआ मांगी। उनका यह सर्वधर्म दौरा न सिर्फ़ उनके समर्थकों के बीच चर्चा का विषय बना, बल्कि सियासी गलियारों में भी हलचल मचा गया।

सुबह सबसे पहले मुख्यमंत्री पटना जंक्शन स्थित प्रसिद्ध महावीर मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने भगवान हनुमान की विधिवत पूजा-अर्चना की और राज्य में शांति व समृद्धि की कामना की। इसके बाद वे पटना साहिब गुरुद्वारा गए, जहां उन्होंने गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष मत्था टेका और आपसी भाईचारा बनाए रखने की प्रार्थना की। गुरुद्वारा प्रबंधन समिति ने मुख्यमंत्री का स्वागत करते हुए उन्हें सरोपा भेंट किया। धार्मिक यात्रा का समापन मुख्यमंत्री ने हाईकोर्ट के समीप एक मजार पर जाकर किया, जहां उन्होंने चादर चढ़ाई और कुछ देर मौन रहकर राज्य में अमन-चैन के लिए दुआ मांगी।

नीतीश कुमार का यह दौरा उनके राजनीतिक व्यक्तित्व की उस विशेषता को दोहराता है जिसके लिए वे लंबे समय से जाने जाते हैं — सर्वधर्म समभाव और सामाजिक एकता के प्रतीक के रूप में। तीन अलग-अलग धर्मस्थलों का दौरा कर उन्होंने यह संदेश दिया कि बिहार की राजनीति सिर्फ़ विकास नहीं, बल्कि सामाजिक सौहार्द और एकता की भी राजनीति है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह दौरा व्यक्तिगत आस्था से कहीं आगे का कदम है। वोटिंग के ठीक बाद और एग्जिट पोल्स के जारी होने के बीच नीतीश कुमार का यह शांत धार्मिक कार्यक्रम एक रणनीतिक राजनीतिक संकेत माना जा रहा है — आत्मविश्वास और संयम का प्रतीक। पत्रकारों द्वारा एग्जिट पोल परिणामों पर पूछे जाने पर नीतीश कुमार मुस्कुराए, लेकिन कुछ बोले बिना गाड़ी में बैठकर रवाना हो गए।

एग्जिट पोल्स में एनडीए को स्पष्ट बढ़त दिखाई गई है, और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में गठबंधन को बहुमत मिलने के संकेत हैं। हालांकि विपक्षी दलों ने इन सर्वेक्षणों को “भ्रामक” करार दिया है, लेकिन एनडीए खेमे में उत्साह का माहौल है। ऐसे में नीतीश कुमार का यह धार्मिक दौरा उनकी राजनीतिक परिपक्वता और धैर्य का उदाहरण माना जा रहा है।

बिहार की सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता को ध्यान में रखते हुए यह कदम राज्य की गंगा-जमुनी तहज़ीब का प्रतीक भी माना जा रहा है। नीतीश कुमार ने हमेशा यह संदेश दिया है कि विकास तभी संभव है जब समाज में शांति और एकता कायम रहे। उन्होंने मंदिर, गुरुद्वारा और मजार तीनों जगह जाकर यह दिखाया कि उनके लिए धर्म विभाजन नहीं, बल्कि सहअस्तित्व का प्रतीक है।

मुख्यमंत्री के साथ इस दौरे में जेडीयू के वरिष्ठ मंत्री अशोक चौधरी और विजय चौधरी भी मौजूद थे। तीनों ने संयुक्त रूप से पूजा और प्रार्थना में भाग लिया। दौरा समाप्त होने के बाद मुख्यमंत्री ने किसी राजनीतिक बयान से परहेज किया और सीधे अपने आवास लौट गए।

बिहार में इस बार दोनों चरणों में रिकॉर्ड मतदान हुआ है। दूसरे चरण में 70 प्रतिशत से अधिक वोटिंग ने यह दिखा दिया कि जनता ने पूरे जोश के साथ लोकतंत्र का उत्सव मनाया है। अब सबकी नज़रें 14 नवंबर पर टिकी हैं, जब मतगणना के बाद यह तय होगा कि बिहार की सत्ता की कमान किसके हाथ में जाएगी।

चुनावी माहौल में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का यह धार्मिक दौरा केवल एक आस्था यात्रा नहीं, बल्कि एक संदेश भरा प्रतीकात्मक कदम है — यह बताने के लिए कि राजनीति और धर्म का रिश्ता टकराव का नहीं, बल्कि समरसता और संतुलन का होना चाहिए। परिणाम चाहे जो भी हों, नीतीश कुमार का यह शांत और संयमित रुख संकेत देता है कि वे बिहार की एकता और सौहार्द की राजनीति के प्रति अब भी प्रतिबद्ध हैं।