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डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर 3.48 लाख की ठगी, बांका का आरोपित गिरफ्तार; नौ राज्यों में 14 शिकायतें

-डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर 3.48 लाख की ठगी, बांका का आरोपित गिरफ्तार; नौ राज्यों में 14 शिकायतें

मुजफ्फरपुर । मुजफ्फरपुर में पुलिस और सीबीआई अधिकारी बनकर लोगों को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर ठगी करने वाले साइबर गिरोह के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। रागिनी देवी से 3.48 लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले में पुलिस ने बांका जिले के प्रिंस कुमार को गिरफ्तार किया है। इस मामले में अब तक दो आरोपितों की गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस के अनुसार, प्रिंस कुमार के बैंक खाते के खिलाफ नौ राज्यों से कुल 14 शिकायतें दर्ज मिली हैं। इसके आधार पर पुलिस कथित अंतरराज्यीय साइबर ठगी नेटवर्क और उससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

पुलिस के अनुसार, पीड़िता रागिनी देवी को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय व्हाट्सएप नंबरों से कॉल किए गए थे। कॉल करने वालों ने खुद को सीबीआई अधिकारी और पुलिसकर्मी बताकर उन्हें गिरफ्तारी का डर दिखाया। इसके बाद मानसिक दबाव बनाकर डिजिटल अरेस्ट का भय पैदा किया गया और उनसे कुल 3.48 लाख रुपये की ठगी कर ली गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की गई। पुलिस कॉल से जुड़े तकनीकी साक्ष्यों और रुपये के लेनदेन की पड़ताल कर रही है।

नगर पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में गठित विशेष टीम इस मामले की जांच कर रही है। पुलिस इससे पहले उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले से एक आरोपित को गिरफ्तार कर चुकी है। इसके बाद 17 अक्टूबर को बांका निवासी प्रिंस कुमार को गिरफ्तार किया गया। इस तरह मामले में अब तक दो आरोपित पुलिस की गिरफ्त में आ चुके हैं।

पुलिस के मुताबिक, प्रिंस कुमार के बैंक खाते के खिलाफ नौ राज्यों से 14 शिकायतें दर्ज मिली हैं। इससे खाते का इस्तेमाल साइबर ठगी से जुड़े अन्य मामलों में किए जाने की आशंका की जांच की जा रही है। हालांकि, इन सभी शिकायतों में आरोपित की भूमिका और संबंधित लेनदेन का संबंध जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

पुलिस ने मामले में कुछ अन्य संदिग्धों की पहचान किए जाने की जानकारी दी है। उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम प्रयास कर रही है। जांच में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों को डराने, बैंक खातों के इस्तेमाल और कथित साइबर नेटवर्क से जुड़े अन्य पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। पुलिस की आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।