संवाददाता। बेगूसराय।
मियां-बीवी राजी तो क्या करेगा काजी? यही हुआ भी। मगर, यहां दोनों नवयुवती थीं। इसलिए आपत्ति थी। आपत्ति भी ऐसी-वैसी नहीं। परिवार से लेकर कोर्ट में वकील तक समझाते रहे, मगर अडिग रहीं। पुलिस थाने तक गईं, लेकिन अंतत: इनके प्यार की जीत हुई। पुलिस ने दोनों को बालिग पाते हुए हमसफर चुनने की स्वतंत्रता में दखल नहीं दिया। नौ घंटे तक चले ड्रामा का अंत हुआ और दोनों हाथ में हाथ डाले निकल गईं नए सफर की ओर। मामला बिहार के बेगूसराय का है।
कहानी की दोनों किरदार लड़कियां हैं। बीए की छात्रा हैं। बेगूसराय के हर्रख की रहने वाली। मुहल्ला एक। सहेलियां पक्की। एक सहेली आयुषी उर्फ पायल ने शुरू से लड़के का रूप रखा है। नाम ही लड़की का है, बाकी वेशभूषा लड़कों वाली। पैंट-शर्ट ही पहनती है। लड़कों की तरह बाल भी रखती है। घड़ी-जूते तक लड़कों जैसे। उसे लड़के जैसा रहना ही पसंद है। दूसरी तरफ पिंकी आम लड़कियों की तरह। लेकिन, इन दोनों के बीच जो हुआ, वह आम नहीं था। दोनों में सहेलियों वाले प्यार के बाद ब्वाॅयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड वाला प्यार बढ़ गया। दोनों कभी भी एक-दूसरे से दूर नहीं रह पा रही थीं। 2017 से साथ हैं और इस तरह का प्यार परवान चढ़ने लगा तो पिंकी के घर वालों ने उसे पायल से दूर करने लगे। दूरी बढ़ाने की कोशिश में इनका प्यार और प्रगाढ़ होता गया। घर वालों ने पिंकी पर बंदिश लगा दी। घर में कैद किया तो शुक्रवार को वह वह पायल से मिलने के लिए बाथरूम के वेंटीलेटर से निकल भागी।

पिंकी के घर वाले बेटी की वापसी के लिए पुलिस में पहुंचे तो दोनों सहेलियां कोर्ट पहुंच गईं। कोर्ट में बांड भरना चाहा कि साथ रहना चाहती हैं, जीवनसाथी के रूप में एक-दूसरे का साथ निभाएंगी, कोई अलग नहीं कर सकता…वगैरह। घर वालों को पता चला तो वह भी कोर्ट पहुंच गए। यहां शाम चार बजे से देर शाम तक ड्रामा चलता रहा। लड़कियां न तो परिवार वालों की बात सुनने को राजी हुईं और न वकीलों के समझाने से फैसला बदलने को तैयार हुईं। उलटा, पिंकी ने अपने माता-पिता पर ही गंभीर आरोप लगा दिए। वकीलों ने भी देखा कि दोनों बालिग हैं और समझाने से नहीं मान रहीं तो कानून का पालन करते हुए दोनों से अटूट प्रेम का बांड भरवा कर पायल के हाथ में पिंकी का हाथ सौंप दिया। दोनों ने शादी की बात नहीं लिखी, लेकिन आयुषी ने पिंकी को साथ रखने और साथ जीने-मरने का बांड भरा।












